IGCSE Hindi (Second Language) Paper-1: Specimen Questions with Answers 112 - 113 of 143

Passage

टेलीविजन समाचार-सूचना का एक सही माध्यम

समाचार का यह माध्यम अब स्थाई रूप से हमारी ज़िदंगी में आ चुका है। अब इसे अपने जीवन से निकालना और हटाना तो दूर की बात, इसे कुछ घंटों तक बंद रखना भी असंभव होता जा रहा है। टीवी पर चलती-फिरती तस्वीरों का नशा ऐसा चढ़ता है कि इसके बंद होते ही कुछ छूट जाने का खतरा होता है। दुनिया भर की अच्छी-बुरी ख़बरें बस एक बटन दबाते ही हमारी आँखों के सामने नाचने लगती हैं। लेकिन क्या इससे हमारी ज़िंदगी में सुकून आया है? मेरा जवाब होगा-नहीं आया है। टीवी देखते हुए हम जोश और दबाव महसूस करते हैं। इस जोश और दबाव की परोक्ष मानसिक प्रतिक्रया को हम समझ नहीं पाते। धीरे-धीरे हम टीवी से चिपक जाते हैं।

समाचार और ज्ञान देने में टीवी की भूमिका अखबार और पुस्तकों से कम है। यद्यपि पुस्तकों और अखबारों की अपेक्षा टेलीविज़न की तस्वीर से एक भावनात्मक जुड़ाव होता हैं फिर भी यह एक ऐसा माध्यम है, जिसे पलटकर या दोबारा नहीं देखा जा सकता। इसमें आँखों के सामने से जो एक बार निकल गया, वह कुछ बिंबों में थोड़ी देर के लिए दिमाग में टिकता हैं। जैसे ही दूसरे दृश्य आँखों के सामने से गुज़रते हैं, वैसे ही पुराने बिंब धूमिल हो जाते हैं। यही कारण है कि टीवी पर आई बड़ी खबर भी वैसी सूचना नहीं दे पाती, जो अखबारो के जरिए मिलती है। मुझे लगता है कि टीवी पर तात्कालिकता अधिक महत्वपूर्ण होती है। सबसे पहले और तुरंत आने की होड़ में खबरों की सतह पर ही टीवी के कैमरे गुजर पाते हैं और टीवी रिपोर्टर समाचार को सतह पर ही दिखाते और बताते हैं। न तो खबरों की गहराई में वे हमें ले जाते हैं और न उसके आगे-पीछे के कारण और प्रभाव के बारे में बताते हैं। लाइव कार्यक्रम दर्शकों की उत्तेजना बनाए रखते हैं। छोटी ख़बरों तक लाइव या आँखों देखा हाल की सनसनी तो रहती है, पर अगले दिन तक उसका असर गायब हो जाता है। शायद कह सकते हैं कि टीवी ने कोई ऐसी उल्लेखनीय प्रस्तुति नहीं की है, जिससे हमारा सामाजिक या राजनीतिक जीवन प्रभावित हुआ हो।

आपके स्कूल में एक वाद विवाद प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। आप भी इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेना चाहते हैं। दूरदर्शन-सूचना का एक सतही माध्यम नामक लेख में से नीचे दिए गए प्रत्येक शीर्षक के अंतर्गत टिप्पणियां लिखें जिस पर आपका भाषण आधारित हो।

Question number: 112 (3 of 3 Based on Passage) Show Passage

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Write in Short

पुस्तकों, अखबारों की अपेक्षा टेलीविज़न की कमज़ोरियाँ

Explanation

टीवी में आँखों के सामने से जो एक बार निकल गया, वह कुछ बिंबों में थोड़ी देर के लिए दिमाग में टिकता हैं। जैसे ही दूसरे दृश्य आँखों के सामने से गुज़रते हैं, वैसे ही पुराने बिंब धूमिल हो जाते हैं। यही कारण है कि टीवी पर आई बड़ी खबर भी वैसी सूचना नहीं दे पाती, जो अखबारो व पुस्तकों के जरिए मिलती है।

Question number: 113

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Essay Question▾

Describe in Detail

निम्नलिखित आलेख के आधार पर सारांश लिखिए और बताइए कि किस सीमा तक यह पहल सफल रही है?

आलेख की मुख्य बातों को अपने शब्दों में लिखिए।

आपका सारांश 100 शब्दों से अधिक नहीं होना चाहिए।

संगत बिन्दुओं के समावेश के लिए 6 अंक और भाषिक अभिव्यक्ति के लिए 4 अंक निर्धारित हैं। पाठांश से वाक्य उतारना उचित नहीं है।

पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल

‘अर्थपावर पर्यावरण को बचाने का ऐसा सकारात्मक अभियान है, जिसका इतिहास कुछ साल ही पुराना है। ‘वर्ल्डवाइड फंड फ़ॉर नेचर’ दव्ारा मौसम परिवर्तन के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए चलाये गये इस अभियान की शुरूआत 2007 में सिडनी के 22 लाख लोगों ने अपने घर और इंडस्ट्री में एक घंटे ग़ैर जरूरी बत्तियां बंद करके की। इसकी शुरूआत इसलिए भी हुई थी कि गरम हो रही धरती और असंतुलित जलवायु के प्रति कोई भी प्रयास कारगर नहीं हो पा रहा था।

2007 में सिडनी से आरम्भ होने वाले इस अभियान में 2008 तक, यानी एक साल में ही 35 देशों के लगभग पोच करोड़ लोग जुड़े। किसी भी अभियान में एक ही वर्ष में इतनी संख्या में लोगों का शामिल होना इसकी लोकप्रियता दर्शाता है। 2009 में विश्व के चार हजार शहरों के लगभग आठ करोड़ लोग एक घंटे के लिए अपने घरों व कारखानों में बिजली के उपकरण बंद रख ‘अर्थपावर’ मुहिम में शामिल हुए।

भारत में 2009 में 50 लाख लोगों ने एक घंटा बत्तियां बंद रखीं। इस अभियान में 56 शहरों ने भाग लिया। कुतुबमीनार, लाल किला, हुमायूं मकबरा, सिनेमा, माल, सभी एक घंटे तक बंद रहे। इस एक घंटे में 1000 मेगावट की बिजली बची, 600 मेगावाट केवल दिल्ली शहर में बची। 2009 में मौसम परिवर्तन को लेकर किये गये किसी भी प्रयास में यह सबसे बढ़ा अभियान था। ‘अर्थपावर’ की इस एक घंटे में ऊर्जा की बचत ने ग्लोबल वॉमिंग से जूझ रही दुनिया को नई राह दिखाई।

प्रति वर्ष मार्च के अंतिम शनिवार को मनाये जाने वाले इस अभियान को इस साल और बल मिला। इस साल भी इस दिन रात्रि साढ़े आठ बजे से साढ़े नौ बजे तक 125 देशों के एक अरब से अधिक लोगों ने धरती के सुरक्षित भविष्य के संकल्प के साथ इसे दोहराया। इस दौरान बिजली बचाने के लिए अंधेरे के आगोश में रही। अभियान की सफलता व इसे मिली जन सहभागिता का अंदाजा इसी से लगता है कि पिछले वर्षों की अपेक्षा इस बार आधा घंटा अधिक बत्तियां बंद रखी गई। निर्धारित समय में विश्व के आठ सौ से ज्यादा प्रमुख स्मारकों की बत्तियां बुझी रहीं। यही नहीं, अनेक नामी गिरामी कंपनियों ने भी अपने कार्यालयों की बत्तियां बुझा कर इस अभियान को सफल बनाने में पूरा सहयोग दिया।

Explanation

अर्थपावर की सफलता

अर्थपावर पर्यावरण को बचाने का एक बेहतर तरीका हैं। यह तरीका इसलिए अपनाना पड़ा क्योंकि हमारी धरती बहुत गरम हो गई थी व इस असंतुलित जलवायु को बचाने का कोई भी तरीका काम नहीं आ रहा था। तभी अर्थपावर का अभियान चलाया गया। इस अभियान से जुड़े लोगों ने घरो मेंं, व्यवसाय में, बड़े-बड़े उद्योगों में यहां तक बड़ी होटलों में आदि जगह एक घंटे बिजली बंद रखी गई जिससे कई मेगावाट बिजली की बचत हुई। यह अर्थपावर हर साल मार्च के अंतिम महिने में रात को 8.30 से 9.30 बजे तक इस अभियान के लोग बिजली बंद रखते है।

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