IGCSE Hindi (Second Language) Paper-1: Specimen Questions with Answers 7 - 8 of 143

Question number: 7

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क्या सचमूच एक से अधिक भाषा जानना ज़रूरी है?

आपके स्कूल में एक भाषण प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है जिसका विषय है ‘क्या एक से ज्यादा भाषाएं जानना आवश्यक है? आप इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेना चाहते हैं। आप अपने विचारों को प्रस्तुत करने के उद्देश्य से उत्तर लिखिए।

आपका भाषण 150 या 200 शब्दों से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

लिखित भाषण पर अंक विषय संबंधी अंतवस्तु, शैली और सही भाषा लिखने पर दिए जाएंगे।

Explanation

किसी भी स्वंतत्र राष्ट्र की अपनी एक भाषा होती है, जो उसका गौरव होती हैं। राष्ट्रीय एकता और राष्ट्र के स्थायित्व के लिए राष्ट्रभाषा की अनिवार्यता किसी भी राष्ट्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। लेकिन अपनी मातृ भाषा के साथ साथ अब आज के युग में यह आवश्यक हो गया है कि हमें एक से अधिक भाषा आनी चाहिए जिससें हम देश में हो विदेश में कहीं पर सामने वाले की भाषा में बात कर सके। आज के जमाने में यह बहुत बड़ी बात होगी हम एक से अधिक भाषा सिख कर उसका प्रयोग कर सकें। हर भाषा आने से कई तरह के लाभ भी होते है। जैसे हम कहीं ऐसे देश में जाएं जहां हमारी मात्‌ भाषा कोई बोलता ही नहीं हो तो हमें उन लोगों को समझने बहुत कठिनाई होगी। वे क्या बोल रहे है हमें पता ही नहीं पड़ेगा। ऐसे अन्य ओर भी कई कारण है जिनकी वजह से हमें एक से अधिक भाषाएं सीखने की आवश्यकता है।

Passage

ध्वनि प्रदूषण

शोर एक अनचाही ध्वनि है। जो ध्वनि कुछ को अच्छी लगती है वहीं दूसरों को नापंसद हो सकती है। यह विभिन्न घटकों पर आधारित होती है। प्राकृतिक वातावरण हवा, समुद्री जानवरों, पक्षियों की स्वीकार युक्त आवाजों से भरा होता है। मनुष्य दव्ारा निर्मित ध्वनियों में मशीन, कारें, रेलगाड़ियां, हवाई जहाज, पटाखे, विस्फोटक आदि शामिल हैं। जो कि ज्यादा विवादित हैं। दोनों तरह के ध्वनि प्रदूषण, नींद, श्रवण, संवाद को ही नहीं यहाँ तक की शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करते हैं।

यह सिदव् हो गया है कि ध्वनि प्रदूषण, वायु प्रदूषण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जिसे पहले वस्तुजनित प्रदूषण का हिस्सा माना जाता था। ध्वनि प्रदूषण अब औद्योगिक पर्यावरण का अनिवार्य अंग है जो कि औद्योगिक शहरीकरण के बढ़ने के साथ बढ़ता ही जा रहा है। यहाँ तक की गैर औद्योगिक क्षेत्रों में भी रंगाई की मशीन, कारों की मरम्मत, ग्राइंडिग आदि कार्यो से आस-पास के वातावरण से शोर पैदा होता रहता हैं यह शोर न केवल चिड़चिड़ाहट, गुस्सा पैदा करता है बल्कि धमनियों में रक्त संचार को बढ़कार हदय की धड़कन को तीव्र कर देता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ता शोर स्नायविक बीमारी, नर्वसब्रेक डाउन आदि का जन्म देता हैं।

शोर, हवा के माध्यम से संचरण करता है। ध्वनि की तीव्रता को नापने की निर्धारित इकाई को डेसीबल कहतें हैं। विशेषज्ञों का कहना हैं कि 100 डेसीबल से अधिक की ध्वनि हमारी श्रवण शक्ति पर असर डालती है। मनुष्य को न्यूरॉटिक बनाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 45 डेसीबल की ध्वनि को, शहरों के लिए आदर्श माना है। बड़े शहरों में ध्वनि का 90 डेसीबल से अधिक हो जाता है। मुम्बई संसार का तीसरा, सबसे अधिक शोर वाला नगर है। दिल्ली ठीक उसके पीछे है।

आपके सकूल में प्रदूषण रोको दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर आपको एक भाषण तैयार करना है। अपने भाषण के लिए ध्वनि प्रदूषण नामक लेख में से नीचे दिए गए प्रत्येक शीर्षक के अंर्तगत टिप्पणियां लिखें जिस पर आपका भाषण आधारित हो।

Question number: 8 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

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Write in Short

ध्वनि प्रदूषण फेलने के कारण

Explanation

1 औद्योगिक व गैर-औद्योगिक शहरीकरण के बढ़ने के साथ ध्वनि प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है।

2 शोर, हवा के माध्यम से संचरण करता है।