IGCSE Hindi (Second Language) Paper-1: Specimen Questions with Answers 59 - 61 of 143

Passage

भूमंडलीकरण के दौर में खेलों के व्यवसायीकरण

व्यवसायीकरण की आंधी से खेलों की दुनिया भी नहीं बची रह सकी। आज खेलों का अपना एक अलग अर्थशास्त्र है। पिछले दिनों भारत में आयोजित इंडियन प्रीमयर लीग यानी आईपीएल ने यह साबित कर दिया कि खेलों का बाजारीकरण किस हद तक किया जा सकता है और यह कितने भारी लाभ का सौदा है। हालांकि, पहले से ही क्रिकेट में पैसों की भरमार रही है लेकिन आईपीएल ने इस खेल की अर्थव्यवस्था को ऐसा विस्तार दिया है कि इसका असर लंबे समय तक बना रहेगा।

एक अनुमान के मुताबिक भारत में खेल उद्योग का आकार दस हजार करोड़ रूपए सालाना तक पहुंच गया है। खेलों ने उत्सव का रूप धारण कर लिया है। यह हमारे दिन-प्रतिदिन के जीवन को प्रभावित करते हैं। बाजार ने खेलों को एक ऐसे उद्योग में तब्दील कर दिया है कि इससे सामान्य जनजीवन पर असर पड़ने लगा है। मैच के हिसाब से लोग अपनी दिनचर्या तय करने लगे हैं। क्रिकेट के अलावा अगर देखें तो भारत में भी अब अन्य खेलों में पैसों का दखल बढ़ा है।

2008 बीजिंग में सम्पन्न ओलंपिक ने भी यह साबित कर दिया कि खेलों की अपनी एक अलग अर्थव्यवस्था है और भूमंडलीकरण के इस दौर में इसकी उपेक्षा नहीं की जा सकती है। बहरहाल, अब हालत ऐसे हो गए है कि खेल प्रतिस्पर्धाएं कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बजट पर असर डालने लगी हैं। इस बात में किसी को भी संदेह नहीं होना चाहिए कि खेलों ने एक उद्योग का स्वरूप ले लिया है।

बहरहाल, इस बार के बीजिंग ओलपिंक के बारह मुख्य प्रायोजक थे। इसमें कोडक जैसी कंपनी भी शामिल रही, जिसने आधुनिक खेलों का साथ 1896 से ही दिया है। इसके अलावा ओलंपिक के बड़े प्रायोजकों में कोका कोला भी थी, जो 1928 से ओलंपिक के साथ जुड़ी हुई हैै। इन बारह मुख्य प्रायोजकों से आयोजकों की संयूक्त आमदनी 866 मिलियन डोलर तक पहुंच गई है। इसके अलावा कई छोटे प्रायोजक भी ओलंपिक में शामिल थे।

वैसे तो ओलंपिक में पदक जीतने वालों को कोई ईनामी राशि नहीं मिलती है। पर जैसे ही कोई खिलाड़ी पदक जीतता है वैसे ही उस पर धन की बरसात होने लगती है। प्रायोजक ऐसे खिलाड़ियों के ज़रिए अपने उद्योग को लोकप्रिय बनाने का मौका नहीं गंवाते हैं। इस भारी लाभ का एक अन्य असर है जिसके अंर्तगत कई सुधार कार्यों के लिए प्रायोजक कंपनियां आगे आई हैं। कंपनियों दव्ारा लाभ का एक अंश उन संस्थाओं को दिया जा रहा है जो स्वास्थ्य, शिशु कल्याण या जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में कार्यरत हैं।

आपके स्कूल में एक निबंध प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। निबंध का विषय है, क्या वास्तव में ‘खेलों ने उद्योग का रूप ले लिया है? ’ भूमंडलीकरण के दौर में खेलों का व्यवसायीकरण नामक लेख में से नीचे दिए गए प्रत्येक शीर्षक के अंतर्गत नोट लिखें जिस पर आपका निबंध आधारित होगा।

Question number: 59 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

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भारत में रोज़मर्रा के जनजीवन पर खेलों प्रभाव

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यह हमारे दिन-प्रतिदिन के जीवन को प्रभावित करते हैं। बाजार ने खेलों को एक ऐसे उद्योग में तब्दील कर दिया है…

इससे सामान्य जनजीवन पर असर पड़ने लगा है। मैच के हिसाब से लोग अपनी दिनचर्या तय करने लगे हैं। क्रिकेट के अलावा अगर देखें तो भारत में भी अब अन्य खेलों में पैसों का दखल बढ़ा है।

Question number: 60 (2 of 3 Based on Passage) Show Passage

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ओलंपिक खेलों में बड़ी कंपनियों की बढ़ती भूमिका

Explanation

कोडक जैसी कंपनी भी शामिल रही, जिसने आधुनिक खेलों का साथ 1896 से ही दिया है। ……

…. ओलंपिक के बड़े प्रायोजकों में कोका कोला भी थी, जो 1928 से ओलंपिक के साथ जुड़ी हुई हैै। …

…. कंपनियों दव्ारा लाभ का एक अंश उन संस्थाओं को दिया जा रहा है जो स्वास्थ्य, शिशु कल्याण या जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में कार्यरत है।. .

Question number: 61 (3 of 3 Based on Passage) Show Passage

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क्रिकेट का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

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पिछले दिनों भारत में आयोजित इंडियन प्रीमयर लीग यानी आईपीएल ने यह साबित कर दिया कि खेलों का बाजारीकरण किस हद तक किया जा सकता है और यह कितने भारी लाभ का सौदा है।

पहले से ही क्रिकेट में पैसों की भरमार रही है लेकिन आईपीएल ने इस खेल की अर्थव्यवस्था को ऐसा विस्तार दिया है कि इसका असर लंबे समय तक बना रहेगा।

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