IGCSE Hindi (Second Language) Paper-1: Specimen Questions with Answers 54 - 56 of 143

Passage

दुकान क्या है, एक झोली में समा जाए बस इतने ही खिलौने हैं उनके पास, लेकिन इनकी विशेषता है कि ये एल्युमिनियम के तारों से बनाए जाते हैं। गुजरात के कच्छ इलाके से आए राजू अपना असली नाम नहीं बताते और कहते हैं कि उन्हें लोग महागुरू राजू के नाम से जानते हैं। वह कहते हैं, “आप बोलिए जो बनावट या रूप बनाना हैं आपके सामने बना दूंगा। एक तार को मोड़ मोड़ का आपका चेहरा बना दूंगा। यही मेरी कला है।” अल्युमिनियम के एक ही तार को मोड़ कर राजू, साइकिल, रिक्शा, बुद्ध की मूर्ति और न जाने क्या क्या बना लेते हैं।

राजू 35 वर्ष पहले लखनऊ आए और फुटपाथ पर ही घूमते फिरते एल्युमिनियम का काम सीखा। वह कहते हैं, “इधर एक फ़ौजी अंकल हुआ करते थे जो तारों का काम करते थे। उन्हें मैंने टीवी पर भी देखा है। मैं उनको चाय देता था और बदले में काम सीखता था। “लेकिन यही काम क्यों? राजू कहते हैं, “असल में मुझे फ़िल्म देखने का शौक था और उसके लिए पैसे चाहिए होते थे। फ़ौजी अंकल कुछ पैसे देते थे तो फ़िल्म देखता था।”

राजू सिकंदर आर्ट गैलरी के पास बैठकर खिलौने बेचता है और उनके ग्राहकों में कई विदेशी भी शामिल हैं। वह बताते हैं, “मुझे सबसे बड़ा आर्डर जर्मनी के एक व्यक्ति ने दिया था एक हज़ार साइकिल बनाने का। उसमें मैंने पैसा बनाया लेकिन मुझे अपने माता पिता को पैसे भेजने होते हैं।”

राजू के डिजाइन कई बड़े कलाकार भी खरीदते हैं। राजू बताते हैं कि उनके पास नामी गिरामी चित्रकार भी आया करते थे। राजू दावा करते हैं कि उन्हाेेंने लखनऊ के बगीचों में और चौराहों पर लगी कई मूर्तियों को भी आकार दिया हैं। लेकिन वह इस बात का बुरा नहीं मानते कि उन्हें इसका कोई श्रेय नहीं मिलता। वह कहते हैं, “हम तो गरीब आदमी हैं। कला आती है लेकिन हमारे संबंध वैसे नहीं हैं। मुझसे कई कलाकार आकर कृतियां बनवाते हैं और अच्छे पैसे देते हैं। मैं इसमें खुश हूं।” सिकंदर आर्ट गैलरी के पास तारों का यह जादूगर बैठे बैठे कई कलाकृतियों को अंजाम दे देता है। कला उसके लिए मायने रखती है लेकिन मशहूर होना उसकी प्राथमिकता नहीं है। महागुरू राजू की जरूरत रोटी है और वह फुटपाथ पर अपनी कला बेचकर मिलने वाली रोटी से खुश रहते हैं।

Question number: 54 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

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फ़ौजी अंकल से कमाए पैसों का राजू क्या करते थे?

Explanation

राजू को फ़िल्म देखने का शौक था और उसके लिए पैसे चाहिए होते थे। फ़ौजी अंकल कुछ पैसे देते थे तो फ़िल्म देखता था।

Question number: 55 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

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खिलौने बनाने का काम सीखने के बदले राजू फ़ौजी अंकल को क्या देते थें?

Explanation

राजू उनको चाय देता था और बदले में काम सीखता था।

Question number: 56

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Describe in Detail

क्यों मुझे यह फिल्म विशेष रूप से पसंद आई या पसंद नहीं आई?

पिछले हफ्त़े आपने एक फ़िल्म देखी। आप स्कूल पत्रिका के ज़रिए इस फिल्म की समीक्षा लिखना चाहते हैं। ताकि आप फिल्म के विभिन्न पक्षों से अपने साथियों को परिचित करवाएं और बताएं कि क्यों यह फिल्म देखनी चाहिए या क्यों नहीं देखनी चाहिए।

आपकी सामीक्षा 150 से 200 शब्दों से अधिक नहीं होना चाहिए।

लिखित समीक्षा पर अंर्तवस्तु के लिए 10 अंको तक और सटीक भाषा के लिए भी 10 अंको तक दिए जाएंगे।

Explanation

क्यों मुझे यह फिल्म विशेष रूप से पसंद आई या पसंद नहीं आई?

पिछले हफ्त़े आपने एक फ़िल्म देखी। आप स्कूल पत्रिका के ज़रिए इस फिल्म की समीक्षा लिखना चाहते हैं। ताकि आप फिल्म के विभिन्न पक्षों से अपने साथियों को परिचित करवाएं और बताएं कि क्यों यह फिल्म देखनी चाहिए या क्यों नहीं देखनी चाहिए।

आपकी सामीक्षा 150 से 200 शब्दों से अधिक नहीं होना चाहिए।

लिखित समीक्षा पर अंर्तवस्तु के लिए 10 अंको तक और सटीक भाषा के लिए भी 10 अंको तक दिए जाएंगे।

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