IGCSE Hindi (Second Language) Paper-1: Specimen Questions with Answers 31 - 35 of 143

Passage

लखनऊ के इक्के और तांगे पर निम्नलिखित लेख पढ़िए तथा दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

अवध की संस्कृति में सुसज्जित घोड़ा परिवहन का साधन और शान का प्रतीक था। मुख्य रूप से तीन प्रकार के ताँगे और इक्के मिलते हैं- बग्गी, फिटन और टमटम। बग्गी बंद डिब्बे की होती है, तो फिटन और टमटम खुले वाहन हैं, जिन्हें नायाबो द्धारा यात्रा में वरीयता दी जाती थी। किन्तु ताँगे व इक्के का शाब्दिक अर्थ अधिक अश्व शक्ति की ओर इंगित करता है। इक्के में एक घोड़ा होता है जबकि बग्गी या ताँगे में दो, चार या अधिक घोड़े होते हैं। यह वास्तव में इस्तेमाल करने वाले की सामाजिक प्रतिष्ठा पर निर्भर करता है।

18वीं सदी के उत्तरार्द्ध और 19वीं सदी के प्रारम्भ में अवध के सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक माहोल में बदलाव आया। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में हल्के वाहनों का निर्माण और इस्तेमाल होने लगा, जिसमें कम से कम अश्व शक्ति लगे। सामान्य बोलचाल में इक्के का अर्थ है इक या एक यानि एक व्यक्ति के इस्तेमाल के लिए। इसके अतिरिक्त ताँगा एक परिवार वाहन था। किन्तु, किफायत की मजबूरी को देखते हुए इक्के में अधिक संख्या में यात्री बैठाने पड़े। ताँगा अपेक्षाकृत भारी और बड़ा वाहन हैं, जिसमें पैरो के लिए अधिक जगह होती हैं और चार से छह वयस्क ओ पीछे कमर लगाकर बैठ सकते हैं।

हर साल इन ताँगों और इक्कों की दौड़ लखनऊ में होती है। इस आर्कषक दौड़ की तैयारियाँ प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का निमत्रंण प्राप्त होने या मीडिया में इसकी घोषणा के साथ ही शरू हो जाती हैं। जँगी घोड़े इस दौरान सबके लिए आर्कषण का केन्द्र-बिन्दु होते हैं। उनके बनाव श्रृंगार का काम शुरू होता है, जो उसी तरह किया जाता है जैसे सौंदर्य प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाली सुँदरियों का किया जाता है। प्रतियोगिता के दिन प्रतिभागी जँगी घोड़े का जो मुखौटा पहनाया जाता है, वह सोने चाँदी का या रंगीन चमकदार चादर से बना होता है। एक विशेष साजज्जा के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के अलॅकरण शामिल होते हैं, जिनका इस्तेमाल घोड़े को सिर से खुर तक सजाने के लए किया जाता है ताकि प्रत्येक इक्के या ताँगे को स्वंय की बेजोड़ पहचान दी जा सके। घोड़े के खुरों का भी श्रृंगार किया जाता है। पुरानी नाल के स्थान पर नई नाल लगाई जाती हैं। पैरों की सुदंरता बढ़ाने के लिए कशीदाकारी युक्त वस्त्र पैरों में डाले जाते हैं और पीतल या चाँदी के घुॅघरू बाँधे जाते हैं। माइक पर घोषणाओं, सीटियाँ बजाने और झंडियाँ दिखाने के साथ ही ताँगे और इक्के वाले अपने-अपने घोड़ों के साथ मोर्चा संभालते हैं। मंच तैयार हैं, एक गोली हवा में छूटती है और दौड़ शुरू होती है।

Question 31 (1 of 6 Based on Passage)

Edit

Write in Short

Short Answer▾

प्रतियोगिता की तैयारी कब शुरू होती हैं?

Explanation

इस आर्कषक दौड़ की तैयारियाँ प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का निमत्रंण प्राप्त होने या मीडिया में इसकी घोषणा के साथ ही शरू हो जाती हैं।

Question 32 (2 of 6 Based on Passage)

Edit

Write in Short

Short Answer▾

घोड़ों के पैरो को किस रूप में सजाया जाता हैं?

Explanation

घोड़ों के पैरों की सुदंरता बढ़ाने के लिए कशीदाकारी युक्त वस्त्र पैरों में डाले जाते हैं और पीतल या चाँदी के घुंघरू बाँधे जाते हैं।

Question 33 (3 of 6 Based on Passage)

Edit

Write in Short

Short Answer▾

सामाजिक आर्थिक बदलावों ने किस तरह वाहनों का प्रभावित किया?

Explanation

18वीं सदी के उत्तरार्द्ध और 19वीं सदी के प्रारम्भ में अवध के सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक माहोल में बदलाव आया। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में हल्के वाहनों का निर्माण और इस्तेमाल होने लगा।

Question 34 (4 of 6 Based on Passage)

Edit

Write in Short

Short Answer▾

अधिक अश्व शक्ति का क्या अर्थ हैं?

Explanation

ताँगे व इक्के का शाब्दिक अर्थ अधिक अश्व शक्ति की ओर इंगित करता है।

Question 35 (5 of 6 Based on Passage)

Edit

Write in Short

Short Answer▾

ताँगा किस रूप में इक्के से अलग वाहन हैं?

Explanation

सामान्य बोलचाल में इक्के का अर्थ है इक या एक यानि एक व्यक्ति के इस्तेमाल के लिए। इसके अतिरिक्त ताँगा एक परिवार वाहन था। किन्तु, किफायत की मजबूरी को देखते हुए इक्के में अधिक संख्या में यात्री बैठाने पड़े। ताँगा अपेक्षाकृत भारी और बड़ा वाहन हैं, जिसमें पैरो के लिए अधिक जगह होती हैं और चार से छह वयस्क ओ पीछे कमर लगाकर बैठ सकते हैं।

Choose Paper