IGCSE Hindi (Second Language) Paper-1: Specimen Questions with Answers 19 - 24 of 143

Passage

चम्बा की घाटी पर आधारित निम्नलिखित लेख एक पत्रिका से लिया गया है। इसे ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए

चम्बा की घाटी

कला पारखी डा. बोगल ने यूं ही चम्बा को अचंभा नहीं कह डाला था। और इसमें सैलानी भी इस नगरी में यूं ही नहीं खिंचे चले आते। चम्बा की वादियों में ऐसा कोई सम्मोहन जरूर है जो सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर देता है और वे बार बार यहां दस्तक देने चले आते हैं। जहां मंदिर में उठती स्वर लहरियां परिवेश को आध्यत्मिक बनाती हैं वहीं रावी की नदी की मस्त रवानगी और पहाड़ो से आते शीतल हवा के झोके से सैलानियों को ताजगी का एहसास कराते हैं। चम्बा का इतिहास, कला, धर्म और पर्यटन का मनोहरी मेल है और चम्बा के लोग अलमस्त, फक्कड़ तबीयत के। चम्बा की पहाड़ियों को ज्यों ज्यों हम पार करते हैं, आश्चर्यों के कई वर्क सामने खुलते चले जाते हैं। प्रकृति अपने दिव्य सौन्दर्य की झलक दिखलाती है। चम्बा के सौन्दर्य को आत्मसात करने के बाद ही डा. बोगल ने इसे अचंभा कहा होगा।

चम्बा का यह सौभाग्य रहा कि उसे एक से एक बड़ा कलाप्रिय, धार्मिक और जनसेवक राजा मिला। इन राजाओं के काल में न सिर्फ यहाँ कि लोककलाएँ फली फूलीं अपितु इनकी ख्याति चम्बा की सीमाओं को पार करके पूरे भारत में फेली। इन कलाप्रिय नरेशों में राजश्रीसिंह (1844), राजारामसिंह (1873) व राजा भूरि सिंह (1904) के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। वास्तुकला हो या भित्तिचित्रकला, मूर्तिकला हो या काष्टकला, जितना प्रोत्साहन इन्हें चम्बा में मिला शायद ही अन्यत्र कहीं मिला हो। चम्बा कलम शैली ने खास अपनी पहचान बनाई है। किसी घाटी की ऊंचाई पर खड़े होकर देखें तो समूचा चम्बा शहर भी किसी अनूठी कलाकृति जैसा ही लगता है। ढलानदार छतों वाले शहर, शिखर शैली के मंदिर, हरा भरा इसका चौंगान और इसकी पृष्ठभूमि में यूरोपीय प्रभाव लिए महलों का वास्तुशिल्प सहसा ही मन मोह लेता है। यहाँ के प्राचीन रंगमंडल व अखंडचंडीमहल में घूमते हुए अतीत की पदचाप भी सुनी जा सकती है।

चम्बा के संस्थापक राजा साहिल वर्मा ने 920 ई. में इस शहर का नाम अपनी बेटी चम्बा के नाम पर क्यों किया था, इस बारे में एक रोचक किंवदंती प्रचलित है। कहा जाता है कि राजकुमारी चंपावती बहुत ही धार्मिक प्रवृति की थी और नित्य स्वाध्याय के लिए एक साधु के पास जाया करती थी। एक रोज़ राजा को किसी कारणवश अपनी बेटी पर संदेह हो गया। शाम को जब साधु के आश्रम में बेटी जाने लगी तो चपके से राजा ने भी उसका पिछा किया। बेटी के आश्रम में प्रवेश करते ही जब राजा भी अंदर गया तो उसको कोई वहां दिखाई न दिया। लेकिन तभी अंदर से एक आवाज़ गूंजी कि उसका संदेह निराधार है और अपनी बेटी पर शक करने की सज़ा के रूप में उसकी निष्कंलक बेटी छीन ली जाती है। साथ ही राजा को एक मंदिर बनाने का आदेश भी प्राप्त हुआ। चम्बा नगर के ऐतिहासिक चौंगान के पास स्थित इस मंदिर को लोग चमेसनी देवी के नाम से पुकारते हैं। वास्तुकला की दृष्टि से यह मंदिर अदव्तीय है। इस घटना के बाद राजा साहिल वर्मा ने नगर का नामकरण राजकुमारी चम्पा के नाम पर किया, जो बाद में चम्बा कहलाने लगा।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही और गलत का निशान लगाकर दीजिए। साथ ही यह वाक्य भी लिखिए जिसके कारण सही या गलत साबित होता है।

सही गलत

Question 19 (8 of 9 Based on Passage)

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Statement

True-False▾

मंदिर में उठती आवाजें माहौल को आध्यत्मिक बना देती हैं।

Answer

TRUE

Explanation

मंदिर में उठती आवाजें माहौल को आध्यत्मिक बना देती हैं।

Question 20 (9 of 9 Based on Passage)

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Statement

True-False▾

चम्बा ऐसी जगह है जहां इतिहास है लेकिन उसका कला के साथ कोई संगम नहीं होता।

Answer

FALSE

Explanation

औचित्य- चम्बा का इतिहास, कला, धर्म और पर्यटन का मनोहरी मेल है

Passage

हम्पी स्वप्नों की नगरी

लगभग पांच शताब्दी पूर्व पुर्तगाली इतिहासकार डोमिंग पेस ने हम्पी (विजयनगर) को स्वप्नों की नगरी कहा था। यह संगम दंश के शासकों की राजधानी थी जिन्होंने 1336 में प्राचीन हम्पी के निर्माण स्थल पर विजय नगर साम्राज्य की नींव रखी थी। लेकिन वह कृष्णदेव राय (1509 - 1529) थे जिन्होंने भव्य महल और मंदिरों से राजधानी को अलंकृत किया और विजयनगर साम्राज्य की सीमाओं को दूर-दूर तक फेलाया जिससे वह दक्षिण भारत का सर्वाधिक शक्तिशाली हिन्दु साम्राज्य बना। परन्तु इस साम्राज्य की शक्ति का पतन पड़ोसी बहमई राज्यों के संघ के 1565 में संयुक्त आक्रमण से आरंभ हुआ। इस विजयनगर को परास्त करके नष्ट कर दिया गया। यह उस साम्राज्य का दुखद अंत था जो कभी अरब सागर से बंगाल की खाड़ी और दक्कन पठार से भारतीय प्रायद्धीप तक फेला था। विजयनगर के भग्नाशेष एक दूसरे पर टंगी विशाल चट्‌टानों की निर्जन दृश्यावली के बीच फेले हैं।

दक्षिण भारत के राजनीतिक परिदृश्य में अपने उदय से पूर्व हम्पी कई शताब्दियों से एक प्रख्यात पावन स्थल था। रामायण में जैसा वर्णित है यह बाली शासित क्षेत्र किष्किन्धा का एक भाग था। इस स्थान में बाली और सुग्रीव, हनुमान, राम सीता, लक्ष्मण से जुड़ी अनेक घटनाएं घटी हैं। तुंगभद्रा नदी के पार स्थित वर्तमान एनीगोण्डी दुर्ग इस बानर साम्राज्य का प्रमुख केन्द्र था। हम्पी के चट्‌टानी पर्वत जैसे हेमकूट पर्वत, मातण्ग पर्वत और माल्यावंथ पर्वत का उल्लेख रामायण में मिलता है। तुंगभद्रा का प्राचीन नाम और पार्वती का नाम पम्पा है जिसने विरूपाक्ष रूपी शिव से विवाह किया था। इसी नाम पर इस नगरी का नाम पड़ा है। हम्पी नाम की उत्पत्ति पम्पा या पम्पापति से ही हुई है।

अपनी राजनीतिक शक्ति के चरम पर विजयनगर साम्राज्य दक्षिण भारत हिन्दु धर्म का प्राचीर था और दिल्ली सल्तनत व पड़ोसी राज्यों जैसे गोलकुंडा, अहमदनगर, गुलबर्गा व बीदर से आक्रमणों को प्रभावी ढंग से रोकता था। लेकिन फिर 1565 में छिड़े तालीकोट युद्ध में बहमई राज्यों ने विजयनगर के अभूतपूर्व इतिहास के पृष्ठों में अंत लिख दिया।

हम्पी की अधिकांश निर्माण रचनाएं कृष्णदेव राय (1509 - 29) के शासनकाल की हैं। विठ्‌ठल और कृष्ण मंदिर, विस्पाक्ष के गोपुर, नरसिम्ह और गणेश की भीमकाय प्रतिमाएं, विराट राजसी सभा मंच, भव्य पुष्करणी सीढ़ीदार जलाशय, जलसेतु और कई अनेक निर्माण कार्य इस प्रतापी शासक की प्रखर प्रतिमा के साक्षात प्रमाण हैं।

हम्पी की यात्रा का आरंभ हेमकूट पर्वत से करना सर्वोतम है। यह पर्वत छोटे छोटे तीन मंदिरों के समूहों से घिरा हुआ है जिनकी सीढ़ीदार पिरामिड सरीखी छतें हैं। अधिकांश मंदिर विजयनगर पूर्वकाल के हैं। हेमकूट पर्वत से विरूपाक्ष मंदिर और उसकी पृष्ठीाूमि में बहती तुंगभद्रा नदी का विहंगम दृश्य देखने को मिलता है। फोटोग्राफी के लिए सह स्थान सर्वोपयुक्त है।

विरूपाक्ष मंदिर का 52 मीटर ऊंचा शानदार पूर्वी गोपुर और भव्य 700 मीटर लंबा मंदिर मार्ग हम्पी का व्यापार केन्द्र है। मंदिर में गोपुर से प्रवेश करने पर भीतरी प्रांगण के केन्द्र में मंदिर है जिसका प्रभावशाली स्तम्भों वाला मंडप है। गर्भगृह एक छोर पर स्थित है। इसमें विरूपाक्ष लिंग है जो परम पवित्र माना जाता है। इसकी भव्य भीतरी छत पर विजयनगर के चित्र हैं। यहां कई छोटे मंदिर हैं जिनमें से एक विद्यारण्य का है। इस महान संत के आर्शीवाद से ही 1336 में इस राजधानी की स्थापना हुई थी। विरूपाक्ष मंदिर ही हम्पी का एकमात्र मंदिर है जहां प्रतिदिन पूजा की जाती है।

Question 21 (1 of 8 Based on Passage)

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हम्पी के चट्‌टानी पर्वत जैसे हेमकूट पर्वत, मातण्ग पर्वत और मल्यावंथ पर्वत का उल्लेख रातचरितमानस मे मिलता है।

Answer

TRUE

Explanation

हम्पी के चट्‌टानी पर्वत जैसे हेमकूट पर्वत, मातण्ग पर्वत और मल्यावंथ पर्वत का उल्लेख रातचरितमानस मे मिलता है।

Question 22 (2 of 8 Based on Passage)

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विजयनगर साम्राज्य के पतन की शुरूआत बहमई राज्यों के संघ के संयुक्त आक्रमण से हुई।

Answer

TRUE

Explanation

विजयनगर साम्राज्य के पतन की शुरूआत बहमई राज्यों के संघ के संयुक्त आक्रमण से हुई।

Question 23 (3 of 8 Based on Passage)

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हम्पी का प्राचीन नाम पम्पा है?

Answer

TRUE

Explanation

हम्पी का प्राचीन नाम पम्पा है

Question 24 (4 of 8 Based on Passage)

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Short Answer▾

किष्किन्धा का भाग किसके शासन का हिस्सा था? इस स्थान में किन पात्रों से जुड़ी घटनाएं घटी हैं?

Explanation

दक्षिण भारत के राजनीतिक परिदृश्य में अपने उदय से पूर्व हम्पी कई शताब्दियों से एक प्रख्यात पावन स्थल था। रामायण में जैसा वर्णित है यह बाली शासित क्षेत्र किष्किन्धा का एक भाग था। इस स्थान में बाली और सुग्रीव, हनुमान, राम सीता, लक्ष्मण से जुड़ी अनेक घटनाएं घटी हैं।

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