IGCSE Hindi (Second Language) Paper-1: Specimen Questions with Answers 130 - 133 of 143

Passage

‘ये शैतान बच्चें’

जैसे हाथ की पांचों अंगुलियां एक बराबर नहीं होती वैसे ही सभी बच्चों का स्वभाव भी एक समान नहीं होता। कोई बच्चा शांत स्वभाव वाला होता है तो कोई इसके एकदम विपरीत गुस्सैल और उद्दंड होता है। उनको ऐसा बनाने में उनके परिवार और आस पास के माहौल का बड़ा योगदान होता है। बेहतर परिस्थितियां मिलने पर बच्चे का व्यक्तित्व शांत और सुदृढ़ बनता है। जबकि ठीक इसके विपरीत परिस्थितियां बच्चों को गुस्सैल और अनुशासनहीन बनाती हैं। ऐसे बच्चे माता पिता के लिए निरंतर चिंता का कारण होते हैं। उनके स्वाभाव में आपस में लड़ाई झगड़ा करना और किसी की न सुनना उनकी आदत बन जाती है। साथ ही माता पिता से यही अपेक्षा करना कि वे उनकी हर जायज़ और नाजायज़ ज़रूरतों को पूरा करेंगे। यही आदतें उन्हें स्वार्थी बनाती हैं। यानी कुल मिला कर माता पिता व परिवार को निरंतर तनाव में रखना।

वैसे तो थोड़ी बहुत अनुशानहीनता हर बच्चे में होती हैं लेकिन शुरू से ही माता पिता के सतर्क एवं अनुशासनपूर्ण बर्ताव से इसको सुधारा जा सकता है। मगर मुश्किल तब होती है जब माता पिता इस समस्या को सुलझाते नहीं और नज़रअंदाज़ करते जाते हैं। कभी- कभी माता पिता अपने बच्चों को पर्याप्त समय देने के बजाय उन्हें तरह-तरह की चीजों से फुसलाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में बच्चों में यह भावना पैदा हो जाए कि अपने माता पिता के लिए वह ही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है। उनके अंदर एक खास किस्म की अहम की भावना पनपने लगती है। आगे चल कर यही भावना उनके अच्छे नागरिक बनने के मार्ग में बाधा बनती है।

बच्चें के व्यवहार पर काम कर रहे अनेक विशेषज्ञों के अनुसार, हमें बच्चों के व्यवहार पर ध्यान रखने की ज़रूरत तभी से होती है जब वे बहुत छोटे होते हैं क्योंकि घर बच्चों की पहली पाठशाला है और माता पिता उसके पहले शिक्षक। कुछ अन्य विशेषज्ञों का ख्य़ाल है कि इसके लिए उन्हें कुछ नियम बनाने चाहिए जैसे कि बच्चों के साथ मिल बैठकर नियमित समय पर टेलिविज़न देखना। उसका समय तय करें और उस समय उनके साथ ही बैठें।

आपके स्कूल में एक भाषण प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। प्रतियोगिता का विषय है कि क्या सचमुच बच्चों में अनुशासनहीनता बढ़ रही है? ये शैतान बच्चे नामक लेख में से नीचे दिए गए प्रत्येक शीर्षक के अंतर्गत नोट लिखें जिसपर आपका भाषण आधारित होगा।

Question 130 (3 of 3 Based on Passage)

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Describe in Detail

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कौन सी आदतें परिवारों में निरंतर तनाव पैदा करती हैं? कोई तीन आदतें बताइए।

Explanation

1. विपरीत परिस्थितियां बच्चों को गुस्सैल और अनुशासनहीन बनाती हैं।

2. बच्चों के स्वाभाव में आपस में लड़ाई झगड़ा करना और किसी की न सुनना उनकी आदत बन जाती है।

3. माता पिता से यही अपेक्षा करना कि वे उनकी हर जायज़ और नाजायज़ ज़रूरतों को पूरा करेंगे। यही आदतें उन्हें स्वार्थी बनाती हैं। इन्हीं आदतो के कारण परिवार में निरंतर तनाव बना रहता है।

Passage

भारत सरकार के एक उपक्रम ‘खादी’ ने देसी आहार का आरंभ किया है। वैसे तो यह कुछ समय पहले से ही प्राकृतिक ढंग से उगाए उत्पाद जैसे दालें, कॉफी और चावल बाजार में ला चुका है। इसके अलावा पुणे के समीप अनेक खेत पूर्णत: प्राकृतिक ढंग से फसल उगा रहे हैं। दार्जिंलिंग के चाय बगानों ने भी प्राकृतिक ढंग से चाय उगाने का प्रयोग आरंभ किया था जिसे अब एक दशक से अधिक समय हो गया है क्योंकि विदेशी उपभोक्ताओं द्वारा प्राकृतिक ढंग से उगाई चाय की मांग बढ़ गई थी।

समस्त विश्व में मनुष्य द्वारा उपभोग किये जाने वाले खाद्य पदार्थों में कीटनाशकों के अधिकाधिक बढ़ते प्रयोग के प्रति जागरूकता अब बढ़ गई है। प्राकृतिक रूप से उगाए पदार्थ वे हैं जिन्हें रासायनिक खाद या कीटनाशकों का प्रयोग किये बगैर प्राकृतिक ढंग से उगाया जाता है। यह एक समग्र अवधारणा है जिसके तहत खेती एवं कृषि कार्यों में प्रकृति के सिद्धांतों का प्रयोग किया जाता है।

प्राकृतिक खाद्य प्रदार्थों की मांग के पीछे एक अन्य कारण लोगों की स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति जागरूकता में वृद्धि भी है। भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय द्धारा चलाए जा रहे ऐसे एक कार्यक्रम की प्रबंधक ममता शर्मा कहती हैं, अब लोग इन्हें खरीदने में रूचि दिखा रहे हैं, प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को खरीदने में भारतीय किसी विदेशी से कम नहीं हैं। खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग द्वारा आरंभ किये देसी आहार का उद्देश्य उपभोक्ता को पौष्टिक और रसायन मुक्त विकल्प प्रदान करना है। देसी आहार के अंतर्गत मिलने वाले उत्पादों की सूची लंबी है और इनमें बासमती चावल, भूरा चावल, चाय, कॉफी, दाल, मिर्च और शहद आदि शामिल हैं। ये सभी उत्पाद पूर्व उनलब्ध उत्पादों से बहुत बेहतर हैं।

आज ऐसे अनेक गैर-सरकारी संस्थान हैं जो प्राकृतिक शाकाहारिता को बढ़ावा दे रहे हैं। ऐसा ही एक संस्थान अहिंसा रिसर्च फाऊंडेशन है। इसके महासचिव एल. एन. मादी कहते हैं, “प्राकृतिक ढंग से उगाए कृषि उत्पादों का विवेचित मेल कहा जा सकता है। यह पर्यावरण अनुकूल परिवेश में उगाए शाकाहारी भोजन के उपभोग का प्रतीक है और इसमें वनस्पति, जीव जंतु या मानव जीवन को कोई हानि भी नहीं पहुंचती है। ऐसा भोजन न केवल स्वास्थ्यवर्द्धक होता है बल्कि शाकाहारिता के वास्तविक रूप का प्रतीक है।”

प्राकृतिक रूप से उगाए खाद्य पदार्थों के साथ-साथ अब प्राकृतिक रूप से उगाए कपास का चलन भी बढ़ता जा रहा है। कपास पर चूंकि हानिकारक कीटों का हमला अधिक होता है इसलिए कपास उगाने वाले किसान रासायनिक खादों और कीटनाशकों का सर्वाधिक प्रयोग करते हैं। कपास को जब प्राकृतिक ढंग से उगाया जाता है तो कीटों के प्रकोप की आशंका भी घटायी जाती है। इस ढंग से उगायी कपास भी उच्च कोटि की होती है। इससे तैयार सूती कपड़ा अधिक टिकाऊ होता है और इसकी दिखावट और चमक भी बेहतर होती है। भारत में कपास की प्राकृतिक ढंग से खेती मध्य प्रदेश में भोपाल के समीप और गुजरात में कच्छ के निकट होती है।

Question 131 (1 of 7 Based on Passage)

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Write in Short

Short Answer▾

प्राकृतिक प्रदार्थ सेहत बेहतर होने के अलावा और किसका प्रतीक हैं?

Explanation

प्राकृतिक ढ़ग से उगाए कृषि उत्पादों का विवेचित मेल कहा जा सकता है। यह पर्यावरण अनुकूल परिवेश में उगाए शाकाहारी भोजन के उपभोग का प्रतीक है और इसमें वनस्पति, जीव जंतु या मानव जीवन को कोई हानि नहीं पहुंचती हैं। ऐसा भोजन न केवल स्वास्थ्यवर्द्धक होता है बल्कि शाकाहारिता के वास्तविक रूप का प्रतीक हैं।

Question 132 (2 of 7 Based on Passage)

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Write in Brief

One Liner▾

प्राकृतिक प्रदार्थों से क्या मतलब है?

Explanation

इन प्राकृतिक प्रदार्थों का मतलब यह है कि रासायनिक खाद व कीटनाशक प्रदार्थों का प्रयोग किए बिना ही प्राकृतिक ढ़ग से उगाया जाता है।

Question 133 (3 of 7 Based on Passage)

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Describe in Detail

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मुकेश कुमार की उम्र 19 वर्ष है। वह दिल्ली विश्वविद्यालय का विद्यार्थी है। वह 7 ए, ग्रेटर कैलाश, नई दिल्ली 110017 में रहता है। वह दिल्ली विश्वविद्यालय में पिछले दो सालों से नाटक कर रहा है। वह दिल्ली की एक नाट्‌य संस्था के साथ दो मंच नाटक भी कर चुका है। उसकी अभिनय और निर्देशन में बेहद दिलचस्पी है।

उसने यह विज्ञापन अखबार में पढ़ा। वह इस नाट्‌यशाला में हिस्सा लेना चाहता है। मुकेश का टेलिफोन न. 23741243 है और उसका ई-मेल पता है

विज्ञापन

रंगमंच अभिनय, मंचसज्जा और निर्देशन के लिए आइए,

नाट्‌यशाला के अंत में नाटक की प्रस्तुति,

शुल्क-500 रूपये,

संपर्क के लिए लिखें,

एस. के. गुप्ता, 260 साकेत, दिल्ली 110029

आप अपने को मुकेश कुमार मानकर आगे दिए गए आवेदन पत्र को भरिए।

Explanation

नाट्‌यशाला 2007

आवेदन पत्र

पूरा नाम. मुकेश कुमार

उम्र … 19 वर्ष … (18 वर्ष से कम उम्र के आयु वाले इसमें भाग नहीं ले सकते।)

स्थानीय पता … 7ए, ग्रेटर कैलाश, नई दिल्ली 110017

दूरभाष न … 23741243

ई. मेल … mk 203@yahoo. com

(अगर है तो)

आपने नाटक के क्षेत्र में क्या किया है? संक्षिप्त में बताइए।

मैंने दिल्ली विश्वविद्यालय में पिछले दो साल से नाटक कर रहा हूं। साथ में दिल्ली की एक नाट्‌य संस्था के साथ दो मंच नाटक भी किए थे।

आप इन नाट्‌यशाला में क्यों शामिल होना चाहते है? कोई दो कारण बताइए।

1. मेरी इस क्षेत्र में रूचि है।

2. मैं दिल्ली में दो साल से यह काम कर रहा हूं।

आपकी दिलचस्पी नाट्‌यशाला में अभिनय, निर्देशन और मंचसज्जा में से किस क्षेत्र में ज्यादा है और क्यों? किन्ही दो कारणों का उल्लेख करें। आप तीन क्षेत्र में से किन्ही एक क्षेत्र को चुन सकते हैं।

1. मेरी अभिनय और निर्देशन में बेहद दिलचस्पी है।

2. मेरी सबसे अधिक रूचि नाट्‌क में है

3. क्योंकि वह यह कार्य पिछले दो सालो से कर रहा हूं।

मैंने तीन क्षेत्रों में से अभिनय को चुना है।

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