IGCSE Hindi (Second Language) Paper-1: Specimen Questions with Answers 118 - 118 of 143

Question number: 118

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Describe in Detail

निम्नलिखित आलेख के आधार पर सारांश लिखिए जिसके दव्ारा ‘मैती आंदोलन’ के विकास और प्रभाव संबंधी बातें शामिल की जा सकें।

आपका सारांश 100 शब्दाेें से अधिक का नहीं होना चाहिए।

संगत बिन्दुओं के समावेश के लिए 6 अंक और भाषिक अभिव्यक्ति के लिए 4 अंक निर्धारित हैं। पाठांश से वाक्य उतारना उचित नहीं है।

उपहार में मिली हरयाली

“पैसे दे दो, जूते ले लों” इस गीत के बोल चाहे जिस तरह के भी हों, विवाह के अवसर पर दून्हे के जूते चूराकर नेग लेने की परंपरा बहुत पुरानी है। लेकिन उत्तर भारत की लड़कियों ने शादी के लिए आए दूल्हों के जूते चुरा कर उनसे नेग लेने के रिवाज को बदल दिया है। वे अब दूल्हों के जुते नहीं चुराती बल्कि उनसे अपने मैत यानी मायके में पेड़ लगवाती हैं। वन संरक्षण की इस नई रस्म को मैती आंदोलन का नाम दिया गया है। इसकी चर्चा देश भर में हो रही है।

अब यह आंदोलन उत्तराखंड सहित भारत के आठ राज्यों में भी अपनी जड़ें जमा चुका है। चार राज्यों में तो वहां की पाठ्‌य पुस्तकों में भी इस आंदोलन की गाथा को स्थान दिया गया है। कनाडा में मैती आंदोलन की क्ष़बर पढ़ कर वहां ेी पूर्व प्रधानमंत्री फ्लोरा डोनल्ड आंदोलन के प्रवर्तक कल्याण सिंह रावत से मिलने गोचर आ गई। वे मैती परंपरा से इतना प्रभावित हुई कि उनहोंने इसका कनाडा में प्रचार प्रसार शुरू कर दिया। अब वहां भी विवाह के मौके पर पेड़ लगाए जाने लगे हैं। मैती परंपरा से प्रभावित होकर कनाडा सहित अमेरिका, ऑस्ट्रिया, नार्वे, चीन, थाईलैंड और नेपाल में भी विवाह के मौके पर पेड़ लगाए जाने लगे हैं।

मैती आंदोलन की भावनाओं से प्रेरित होकर अब लोग जहां पेड़ लगा रहे हैं वहीं उनके व्यवहार भी बदल रहे हैं। पर्यावरण के प्रति उनकी सोच में भी परिवर्तन आ रहा है। यही वजह है कि अब लोग अपने आस पास के जंगलों को बचाने और इनके संवर्धन में भी सहयोग देने लगे हैं। इस आंदोलन के कारण पहाड़ों पर काफ़ी हरयाली दिखने लगी है और सरकारों को अब अपने वृक्षारोपण कार्यक्रम के बारे में सोचने पर विवश कर दिया हैं।

पर्यावरण संरक्षण के लगातार बढ़ते इस अभियान को अपनी परिकल्पना और संकल्प से जन्म देने वाले कल्याण सिंह रावत ने कभी सोचा भी नहीं था कि उनकी प्रेरणा से उत्तराखंड के एक गांव से शुरू हुआ यह अभियान एक विराट और स्वंय स्फूर्त आंदोलन में बदल जाएगा।

Explanation

”मैती आंदोलन’ के विकास और प्रभाव

यह आंदोलन वन संरक्षण के ऊपर है ऐसे तो वनों को बचाने के लिए कई अंादोलन हुए ओर वे सफल भी हुए लेकिन यह आंदोलन कुछ अलग ही हैं। क्योंकि इसमें ऐसे रिवाज या रस्म को वन संरक्षण के रूप में परिवर्तित कर दिया गया। जो आगे जाकर यह देश विदेश तक पहुंच गया। इसका प्रभाव इतना पड़ा कि इस आंदोलन ने कई जंगलों को कटने से बचा लिया व इससे चारों ओर हरियाली नजर आने लगी। आज हम सब को भी वनों को बचाने के लिए हर जगह लोगों को जागरूक करना चाहिए। हरयाली के लिए घरों में, ऑफिस में, बगीचों में, स्कुलों में आदि जगहों पर वृक्ष लगाकर चारो ओर हरयाली करनी चाहिए। ऐसे कार्यक्रमों में सरकार को भी अपनी भागीदारी देनी चाहिए। क्योंकि वन प्रकृति का अनुपम उपहार हैं। इसलिए इसे बनाए रखने की हम सबकी जिम्मेदारी हैं। इस मैती आंदोलन से एक लड़की को विवाह स्वरूप उसके रस्म में हरियाली मिलती हैं। यह हरियाली सदैव बनाऐ रखें। यही इस आंदोलन का उद्देश्य हैं।

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