IGCSE Hindi (Second Language) Paper-1: Specimen Questions with Answers 6 - 6 of 143

Question 6

Edit

Describe in Detail

Essay▾

निम्नलिखित आलेख के आधार पर सारांश लिखिए और बताइए कि क्या सचमुच मशीनें सारी तकलीफें दूर कर सकती हैं? आलेख की मुख्य बातों को अपने शब्दों में लिखिए।

आपका सारांश 100 शब्दों से अधिक नहीं होना चाहिए।

संगत बिन्दुओं के समावेश पर 6 अंक और भाषिक अभिव्यक्ति के लिए 4 अंक निर्धारित हैं। पाठांश से वाक्य उतारना उचित नहीं है।

मशीनें सारी तकलीफें दूर नहीं कर सकती

हमारे अनुभव तथा भावनाएँ मूल रूप से हमारे शरीर तथा मन पर निर्भर होती हैं। रोज़मर्रा की जिंदगी के अनुभव के आधार पर हम यह जानते हैं कि मन की खुशी लाभदायी होती है। उदाहरण के लिए दो अलग-अलग आदमी एक ही तरह के दुख को झेलते हैं, परन्तु उनमें से एक अपने मन की शक्ति की वजह से उस दुख का सामना अधिक आसानी से कर सकता है। मेरे विचार में ऐसा सोचना गलत हैं कि मशीनें आदमी की सभी तकलीफें देर कर सकती हैं। बेशक आरामदायी चीजें बहुत उपयोगी हैं, पर साळ-साथ यह भी स्वाभाविक है कि हमारी सभी समस्याएँ केवल इन भौतिक सुख-सुविधाओं की वस्तुओं से दूर नहीं हो सकती। भौतिक वस्तुओं से भरे समाज मेें अधिक नहीं तो उतनी ही मानसिक अशांति और निराशा है। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि आख़िकार हम मनुष्य हैं। हम मशाीनों से नहीं बने और हमारे शरीर मशीनों से अलग हैं। इसलिए हमें अपनी आंतरिक क्षमताओं और गहरे जीवन-मूल्यों के प्रति गंभीरता से सोचना चाहिए। मेरा यह विश्वास है कि यदि कोई सुखी जीवन चाहता है तो आंतरिक और बाहरी दोनों ही बातों की ओर, दूसरे शब्दों में भौतिक और मानसिक विकास की ओर ध्यान देना आवश्यक है। हम आध्यात्मिक विकास की भी बात कर सकते हैं, परंतु जब मैं आध्यात्मिक कहता हूँ तो मेरा मतलब किसी खास धर्म से नहीं है। जब मैं आध्यात्मिक बल की बात करता हूँ तो मेरा मतलब मनुष्य के अच्छे गुणों से है। से गुण जन्म से मिले हुए हैं। ये सब हमारे जीवन में बाद में नहीं आते। धर्म के प्रति विश्वास बाद में आता हैं। सभी धार्मिक उपदेश हमें एक अच्छा आदमी बनने की सलाह देते हैं। से उपदेश हमारे जन्मजात अच्छे गुणों को और शक्तिशाली बनाते हैं। हम सभी के अंदर सृजन करने का एक बहुत ही सहज गुण होता हैं, जिसकी पहचान बहुत ही जरूरी है।

Explanation

लेख

मशीने सारी तकलीफे दूर कर दें यह सही नहीं है क्योंकि ये मशीनें को व्यक्ति अपने सुख के लिए स्वंय बनाया है ताकि वह इसका उपयोग कर सके। हमें तो भगवान ने बनाया हैं। लेकिन इसान की जो भावनाएं होती हैं होती है वे सही रूप से व्यक्ति के शरीर व मन में होती है। यह कितनी होती है यह व्यक्ति के ऊपर निर्भर करती है। क्योंकि व्यक्ति का शरीर इन मशीनों से अलग हैं। मशीनें हमें सब सुविधाएं दे सकती हैं लेकिन जो व्यक्ति के अंदर जो अनेक भावनाएं है वे नहीं दे सकती हैं। इंसान काम आसान जरूर कर सकती है। पर उनके सुख व दुख को केवल एक व्यक्ति ही बांट सकता हैं। इसलिए मशीनें केवल भौतिक सुख-सुविधाओं की वस्तु न की वे व्यक्ति के सारी दुखों का अंत करती हैं इसलिए मशीन व व्यक्ति दोनों अलग हैं।

Choose Paper