IGCSE Hindi (Second Language) Paper-1: Specimen Questions with Answers 73 - 74 of 143

Passage

स्वाद क़ायम है परोंठें वाली गलीं का

दिल्ली के चाँदनी चौक इलाके में कई मशहूर गलियाँ और कूचे हैं। हर एक सँकरी गली अपनी एक खास पहचान लिए हुए है। इन्हीं में सें है मशहूर ‘परोंठे वाली गलीं’ जिसकी चर्चा देश विदेश हर जगह सुनी जा सकती हैं। लेकिन एक समय अपने परोंठों के लिए जानी-पहचानी इस गली में अब बड़ा अंतर आ चुका है समय के चक्र और व्यवसायिकता की दौड़ में परोंठे वाली गली अपनी मौलिकता खो चुकी है। सैकड़ों वर्षों से मशहूर इस गली में कभी लगभग सभी दुकानें परोंठें की हुआ करती थीं। लेकिन आज स्थिति ये है कि इस सिर्फ़ तीन दुकानें परोंठें की हैं। बाकी की दुकानें आपको साड़ियों और कपड़ों की दुकानों में परिवर्तित हो चुकी हैं।

आज जो तीन परोंठें की दुकानें आपको इस गली में मिल जाएँगी वे लगभग 100 साल से भी ज्यादा पुरानी हैं। इन दुकानों के मालिको की पांचवीं पीढ़ी के लोग इन दुकानों को चला रहे हैं। इन दुकानों में इंदिरा गांधी, जवाहर लाल नेहरू जैसे बड़े नेताओं की भोजन करते हुए तस्वीरें लगी हैं। जो किसी ज़माने में इनकी महत्ता का आभास दिलाती हैं। अभी भी इन तस्वीरों की छाया में यहाँ बड़ी संख्या में लोग परोंठें खाने आते हैं। इनमें बड़ी संख्या में विदेशी सैलानी भी होते हैं।

दिल्ली के उपनगर गुड़गाँव से परोंठें का मज़ा लेने आए वरूण जैन कहते हैं, “भीड़-भाड़ वाली इस गली में राह चलते ढेरों लोगों के बीच परोंठें खाने का एक अलग अनुभव है।” वरूण मानते हैं कि पाँच सितारा होटलों में भी उन्हें कभी ऐसा स्वाद चखने को नहीं मिला। परोठें की शौकीन श्रुति का कहना था, “पिज्ज़्ाा और बर्गर अपनी जगह हैं लेकिन वे इस गली के आकर्षण के साथ मुकाबला नहीं कर सकते।” पत्तलों की जगह अब स्अील की प्लेटों ने ले ली है। लेकिन जो चीज़ नहीं बदली है वह है शुद्धता की गांरटी है जिसका दावा ये दुकानदार अभी भी करते हैं। फ़ास्ट फूड की दुकानों से मुकाबले की बात दुकानदार रमेश चंद्र शर्मा नहीं मानते हैं। वे कहते हैं, “हमारा मुकाबला केवल अपने आप से है। पित्ज़ा और पराँठे का मुकाबला हो नहीं सकता।”

इन सबके बावजूद पराँठे वानी गली के पराँठा दुकान मालिकों को अपनी दकानों के भविष्य की चिंता है। नई पीढ़ी के उनके बच्चे अब पढ़-लिख चुके हैं। वे नए पेशों में आना चाहते हैं जैसे कि इंजीनियरिंग, डाक्टरी इत्यादी। रमेश चंद्र शर्मा भावुक होकर कहते हैं, ” ये दुकान मेरी माँ है, मेरा मोह है। मेरी ममता इसी से है और किसी से नहीं। कोई-न-कोई तो इसे चलाएगा ही और बाप-दादाओं की विरासत को आगे ले जाएगा।” बदलते स्वाद और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के चलते इस गली का आकर्षण भले ही कम हुआ हो लेकिन उत्सुकता अभी भी कायम है। इन गलियों की परंपरा और इनके चाहने वालों के कारण यह गली अभी भी ज़िंदा है।

Question 73 (8 of 8 Based on Passage)

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रमेश चंद्र शर्मा की दृष्ठि में वास्तविक मुकाबला किस से है?

Explanation

वे कहते हैं, “हमारा मुकाबला केवल अपने आप से है। पित्ज़ा और पराँठे का मुकाबला हो नहीं सकता

Question 74

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मोबाइल फोन पर प्रतिबंध

अगले महीने की पहली तारीख से स्कूल में मोबाइल फोन के प्रयोग पर पाबंदी होगी। कोई भी विद्यार्थी स्कूल में मोबाइल फोन का प्रयोग करते हुए देखा गया तो उसका मोबाइल फोन जब्त कर लिया जाएगा।

आदेशानुसार

प्रधानाचार्य

आपके स्कूल में मोबाइल फोन पर रोक लगाई गई है। आप एक पत्र लिखकर प्रधानाचार्य को अपने विचार व्यक्त किजिए। यह बताइए कि आप इस प्रतिबंध से सहमत हैं या असहमत। आपका पत्र 150 या 200 शब्दों से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

लिखित पत्र पर अंक विषय संंबंधी अंर्तवस्तु, शैली और सही भाषा लिखने पर दिए जाएंगे।

Explanation

उदयपुर

दिनांक: 21 जून, 2015

प्रधानाचार्य महोदय

केंद्रीय विद्यालय

उदयपुर

माननीय महोदय

विषय: -विद्यालय में मोबाइल फोन पर प्रतिबंध लगाने हेतु-

सविनय नम्र निवेदन है कि आपके आदेशनुसार जानकारी मिली है कि आपने विद्यालय में फोन रखने पर प्रतिबंध लगा दिया हैं मैं इस बात से एक तरफ तो सहमत हूं क्योंकि जहां इस फोन के फायदे अनेक है वहां नुकसान भी अधिक है। इससे स्कूल में रहते हुए बच्चों की पढ़ाई का नुकसान भी होता क्योंकि फोन लाने पर बच्चों का पूरा ध्यान केवल मोबाइल पर रहता हैं।

लेकिन दूसरी तरफ इससे मैं सहमत नहीं हूं क्योंकि इस फोन से ओर भी कई फायदे है इससे कई प्रकार की सुविधाएं भी हैं। लेकिन फिर भी आपने बच्चों का भविष्य ध्यान में रखकर यह आदेश निकाला हैं। इसके लिए धन्यवाद।

आपकी आज्ञाकारी

समस्त छात्र व छात्राए।

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