CIE Hindi Paper-1: Specimen Questions 37 - 43 of 143

Passage

”राजस्थान के मंदिरों में होली उत्सव”

कई दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में भक्त भगवान के साथ होली खेलते हैं तो कल़ाकार संगीतमय प्रस्तुतियों के साथ उनकी आराधना करते हैं। इसमें मुस्लिम कलाकार भी बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। इन दिनों में जयपुर के गोविंद देव के मंदिर में नजारा देखने लायक होता है। कहीं मंदिर में रंग गुलाल-अबीर की रौनक होती है तो कहीं भक्त भगवान के साथ फूलों की होली खेलते है। इस दौरान मंदिरों की छटा इंद्रधनुषी हो जाती है। रोज़ अलग-अलग कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर अपने प्रिय कान्हा के साथ होली खेलने का चित्रण करते हैं।

मंदिर से जुड़े गौरव धामानि कहते हैं, ”यह ढाई सौ साल से भी ज्यादा पुरानी परंपरा है और रियासत काल से चली आ रही है। दरअसल ठाकुर जी (भगवान) को रिझाने के लिए होली उत्सव शुरू किया गया था, जो अब भी जारी है।” तीन दिन तक चलने वाले इस उत्सव में राज्य भर के करीब दो सौ कलाकार अपनी कला का भक्ति भाव से प्रदर्शन करते हैं।”

आयोजन के पहले दिन मंदिर में झांकी सजती हैं और सभी कलाकार अपनी-अपनी कला से वंदना करते हैं। जैसे कि कत्थक नृत्यांगना गीतांजलि ने नृत्य पेश किया। उन्होंने कहा, ”यह भगवान की बंदगी है। यह समर्पण है, हमने जो कुछ भी सीखा है, उसे ईश्वर के चरणों में समर्पित कर दिया।” कत्थक गुरू डाक्टर शशि सांखला कहती हैं, ”कृष्ण कथानक और होली का गहरा रिश्ता है। श्रीकृष्ण को कत्थक का आराध्य देव माना जाता है। होली आती है तो कृष्ण को याद किया जाता है क्योंकि उनकस स्वभाव चंचल है।”

त्यौहार प्रेम और सदभाव का संदेश लेकर आते हैं। भक्ति से भरे माहौल में जब नगाड़े की आवाज़ सुनाई देती है तो यह शफ़ी मोहम्मद का हुनर है। ये हज करके लौटे हैं और सच्चे मुसलमान हैं लेकिन उनके धर्म ने उन्हें भक्ति की इस रसधारा में शामिल होने से नहीं रोका। वह कहते हैं, इबादत में क्यों फ़र्क किया जाए। हम पीढ़ियों से इससे जुड़े हैं। गोविंद के दरबार में आते हैं और अपने साज़ से इबादत करने वालों का साथ देते है। शफ़ी कहते हैं, रजवाड़ों के समय से हम मंदिरों में जाते हैं, शहनाई बजाते हैं, नगाड़ा बजाते हैं। भजन भी गाते हैं।

जोधपुर के राजा मान सिंह के दरबार में रमज़ान खान गायक थे। उनकी होली बड़ी मशहूर थी। रमज़ान होली के गीत गाते थे। तब धर्म के आधार पर कोई दीवार नहीं होती थी। गोविंद देव मंदिर का होली उत्सव नेक इबादत का समागम था। न कोई धर्म-संप्रदाय की श्रेष्ठता का सवाल उठा, न किसी ने पूछा कि खुदा बड़ा है या भगवान।

Question number: 37 (1 of 6 Based on Passage) Show Passage

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कलाकारों के प्रदर्शन में होली खेलकर किसे आकर्षित किया जाता हैं?

Explanation

अलग-अलग कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर अपने प्रिय कान्हा के साथ होली खेलने का चित्रण करते है।.

Question number: 38 (2 of 6 Based on Passage) Show Passage

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होली के समय भगवान कृष्ण की उपासना क्यों की जाती हैं?

Explanation

रीकृष्ण को कत्थक का आराध्य देव माना जाता है। इसलिए होली आती है तो कृष्ण को याद किया जाता है क्योंकि उनका स्वभाव चंचल है व कृष्ण की उपासना की जाती है।.

Question number: 39 (3 of 6 Based on Passage) Show Passage

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अबीर गुलाल और फूलों की वर्षा किस रूप में नजर आती हैं?

Explanation

मंदिर में रंग गुलाल-अबीर की रौनक होती है तो कहीं भक्त भगवान के साथ फूलों की होली खेलते है। इस दौरान मंदिरों की छटा इंद्रधनुषी रूप में नजर आती है।

Question number: 40 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

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शफ़ी मोहम्मद हिंदू मंदिर में संगीत बजाने को किस रूप में देखते हैं?

Explanation

शफ़ी मोहम्मद हिंदू मंदिर में संगीत बजाने वालों को भक्ति रसधारा के रूप में देखते हैं।

Question number: 41 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

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कलाकारों के प्रदर्शन के पीछे प्रमुख उद्देश्य क्या होता हैं?

Explanation

भक्ति भाव का उद्देश्य होता है।

Question number: 42 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

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गोविंद देव मंदिर का होली उत्सव किस भावना का प्रतीक हैं?

Explanation

भक्ति भाव व नेक इबादत का प्रतीक है।.

Passage

भारतीय मसालों पर लिखे इस आलेख को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

एक लोककथा है कि एक वैद्यजी थे। उनके बगल के घर में नगर श्रेष्ठि विराजते थे। दोनों घरों के बीच साझा दीवार होने से उधर की बातें इधर और इधर की बाते उधर कानों में पड़ना स्वाभाविक था। जाड़ें दिन थे। शाम का खाना जीमने बैठे नगरश्रेष्ठि को वैद्यजी ने कहते सुना कि उन्हें एक कटोरा भर दही भी दिया जाए। वैद्यजी ने बहू से कहा, जाड़े की शाम को एक कटोरा भर दही दिया जाए। इतना सुनकर वैद्यजी ने अपनी बहू से कहा ”जाड़े की शाम को एक कटोरा भर दही खाकर नगरश्रेष्ठि सर्दी और खांसी को निमंत्रण दे रहे हैं। देखना कल ही मुझे उनके इलाज से इतने पैसे मिलेंगे कि तेरे कंगन की जोड़ी पक्की”।

बहू उमंग से उछलती भीतर चली गई। तभी सेठानी की आवाज आई। परसने वाली से उन्होंने कहा कि सेठजी के दही में वह अच्छी चुटकी काली मिर्च, भुने जीरे और काले नमक की बुकनी डालना न भूले हाँ…. । इतना सुनकर वैद्यजी का चेहरा उतर गया और ये बहू से बाले”अब तो सालभर तक तेरे कंगन बनने से रह”।

इसी प्रकार हमारे यहाँ घर-घर में रसोई को रससिद्ध बनाने वाले मिर्च- मसालों से जुड़ी मनोरंजक गाथाएं हमारी लोककथाओं, पुराणों और इतिहास में यहाँ से वहाँ तक विराजमान हैं। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक फेले विशाल देश में खान पान में जो विविधता है यही विविधता मसालों के प्रयोग में भी है। हमारी भाषा और साहित्य की ही तरह हमारे मसाले भी भारतीय और गैर भारतीय तत्वों का एक मिला-जुला बजाना है। उदाहरण के लिए ईसा की पहली सदी तक दक्षिण भारत में चीन से चीनी आती थी। शेष भारत शहद और गुड़ से काम चलाता र्था फिर धीरे-धीरे चीनी का ऐसा चस्का उतर को भी लग गया, कि वहाँ चीनी के स्वरूप में सुधार भी होने लगे। चाय की ही तरह चीन से दालचीनी आई तो कर्पूर और राई भी आए। दक्षिण भारत में कपूर को आज भी ’चीन कर्पूर ’कहते हैं।

मेथी दाना आयुर्वेद की राय में मधुमेह रोगियों के लिए उत्तम दवा है। जिसका प्रयोग जेवनारों में दिव्य सब्जियां या जाड़ों के मेथीपाक जैसे व्यंजन बनाने में सहायक होता है। मेथी भी सदियों पूर्व भारत में यूनान के व्यापारियों के साथ भारत आया। बंगाली खाने की जान पंचफोड़न (यानी मेथी, सॉफ, जीरा, पीली सरसो और कालौंजी इन पांच मसालों के मिश्रण) में भी मेथी विराजमान है। पंचफोड़न के दो अन्य मसाले सॉफ और जींरा भी भूमध्यसागरीय क्षेत से ही भारत आए। अचार, चटनी, मुरब्बे के अलावा उदर रोगों के लिए भी सौंफ का एक शीतलता देने वाले मसाले के रूप में प्रयोग होता हैं। इसी प्रकार जीरे का प्रयोग भारत के सभी प्रांतों में बहुलता से होता है। इसको पाचन क्रिया में मददगार और फ़ितरत (स्वभाव) से गर्म बताया गया है। औषधि के रूप में इसके प्रयोग का वर्णन आयुर्वेदज्ञ चरक ने अपनी पुस्तक ’चरक संहिता’ में किया है। शल्य चिकित्सक सुश्रुत ने भी दवा के रूप् में इसे उपयोगी बताया है।

Question number: 43 (1 of 8 Based on Passage) Show Passage

True-False▾

Following Statement is true or false:

वैद्यजी आश्वस्त थे कि कल ही उन्हें बुलावा आएगा।

Answer

TRUE

Explanation

वैद्यजी आश्वस्त थे कि कल ही उन्हें बुलावा आएगा।

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