CIE Hindi Paper-1: Specimen Questions 126 - 130 of 143

Passage

राजस्थान के झरोखे से झलकता झालावाड़

झालावाड़ मालवा के पठार के छोर पर बसा एक जनपद है, जिसके अंदर झालावाड़ और झालरापाटन नामक जुड़वाँ शहर अपने आप में एक आदर्श पर्यटक स्थल हैं। दोनों शहरों की स्थापना 18वीं शताब्दी के अंत में झाला राजपूतों

दव्ारा की गई थी। दोनों शहरों के मध्य कारीब 7 कि. मी. की दुरी हैं, पर आजादी से पूर्व दोनों शहर झाला वंश के राजाओं की एक समृदव् रियासत का हिस्सा थे।

झालावाड़ शहर के पर्यअन आर्कषणों में से एक है गढ़ महल जो झाला राजाओं का भव्य महल था। शहर के मध्य स्थित इस महल के तीन कलात्मक दव्ार हैं। महल का अग्रभाग चार मंजिला है, जिसमें मेहराबों, झरोखों तथा गुम्बदों का अनुपातिक विन्यास देखने योग्य है। परिसर में नक्कारखान के निकट एक पुरात्व संग्रहालय भी देखने योग्य है। महल का निर्माण 1838 में राज राणा मदन सिंह दव्ारा शुरू करवाया था, जिसे पृश्वीसिंह ने पूरा करवाया। 1921 में राजा भवानी सिंह ने महल के पिछले भाग में एक नाट्‌य शाला का निर्माण करवाया। इसके निर्माण में यूरोपियन ओपेरा शैली का विशेष ध्यान रखा गया था।

शहर से करीब 6 कि. मी. दूर कृष्ण सागर नामक विशाल सरोवर है, जो एकांतप्रिय लोगों को बहुत पंसद आता है। यहाँ किनारे पर एक काष्ठ निर्मित इमारत है। इसे रैन बसेरा कहते हैं। यह इमारत महाराज राजेंद्र सिंह ने ग्रीष्मकालीन आवास के लिए बनवाई थी। यहाँ पर स्थित मंदिर भी शहर की पहचान माने जाते हैं। अत: झालारापाटन को घंटियों का शहर भी कहा जाता है। शहर के मध्य स्थित सूर्य मंदिर झालारापाटन का प्रमुख दर्शनीय स्थल है और वास्तुकला की दृष्टि से अहम भी। इसका निर्माण 10वीं शताब्दी में मालवा के परमार वंशी राजाओं ने करवाया था। हालांकि यह सूर्य मंदिर के नाम से प्रसिदव् है। लेकिन मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की प्रतिमा विराजमान है। इसलिए इसे पद्यनाभ मंदिर भी कहा जाता है। सुर्य मंदिर से कुछ दूर ही प्रसिदव् शांतिनाथ मंदिर स्थित है। 11वीं शताब्दी में निर्मित इस जैन मंदिर के गर्भगृह में भगवान शांतिपथ की सौम्य प्रतिमा विराजमान है, जो 11 फुट ऊँची हैं तथा काले पत्थर से निर्मित है।

झालारापाटन में भी एक विस्तृत सरोवर है, जिसे गोमती सागर कहते हैं। इसके तट पर दव्ारीकाधीश मंदिर एक दर्शनीय स्थान है। झाला राजपूतों के कुल देवता श्री दव्ारीकाधीश को समर्पित मंदिर 1796 में झाला जालिम सिंह दव्ारा बनवाया गया था। शहर के एक छोर पर ऊँची पहाड़ी पर नौलखा का किला एक और पर्यटन आकर्षण है। यह एक अर्धनिर्मित किला हैं, जिसका निर्माण राज राणा पृश्वी सिंह दव्ारा 1860 में शुरू करवाया गया था। इतने सारे पर्यटन आयामों को अपने में समेटे झालावाड़ आज पर्यटकों में अपनी अलग पहचान बना चुका हैं।

Question number: 126 (8 of 9 Based on Passage) Show Passage

True-False▾

Following Statement is true or false:

झालावाड़ और झालरापाटन एक प्रमुख पर्यटक स्थल है।

Answer

FALSE

Explanation

औचित्य-झालावाड़ और झालरापाटन जुड़वाँ शहर हैं जो पर्यटन का प्रमुख स्थान है।

Question number: 127 (9 of 9 Based on Passage) Show Passage

Short Answer Question▾

Write in Short

झाला जालिम सिंह ने 1796 में क्या किया?

Explanation

झाला राजपूतों के कुल देवता श्री दव्ारीकाधीश को समर्पित मंदिर 1796 में झाला जालिम सिंह दव्ारा बनवाया गया था।

Passage

’ये शैतान बच्चें’

जैसे हाथ की पांचों अंगुलियां एक बराबर नहीं होती वैसे ही सभी बच्चों का स्वभाव भी एक समान नहीं होता। कोई बच्चा शांत स्वभाव वाला होता है तो कोई इसके एकदम विपरीत गुस्सैल और उद्दंड होता है। उनको ऐसा बनाने में उनके परिवार और आस पास के माहौल का बड़ा योगदान होता है। बेहतर परिस्थितियां मिलने पर बच्चे का व्यक्तित्व शांत और सुदृढ़ बनता है। जबकि ठीक इसके विपरीत परिस्थितियां बच्चों को गुस्सैल और अनुशासनहीन बनाती हैं। ऐसे बच्चे माता पिता के लिए निरंतर चिंता का कारण होते हैं। उनके स्वाभाव में आपस में लड़ाई झगड़ा करना और किसी की न सुनना उनकी आदत बन जाती है। साथ ही माता पिता से यही अपेक्षा करना कि वे उनकी हर जायज़ और नाजायज़ ज़रूरतों को पूरा करेंगे। यही आदतें उन्हें स्वार्थी बनाती हैं। यानी कुल मिला कर माता पिता व परिवार को निरंतर तनाव में रखना।

वैसे तो थोड़ी बहुत अनुशानहीनता हर बच्चे में होती हैं लेकिन शुरू से ही माता पिता के सतर्क एवं अनुशासनपूर्ण बर्ताव से इसको सुधारा जा सकता है। मगर मुश्किल तब होती है जब माता पिता इस समस्या को सुलझाते नहीं और नज़रअंदाज़ करते जाते हैं। कभी- कभी माता पिता अपने बच्चों को पर्याप्त समय देने के बजाय उन्हें तरह-तरह की चीजों से फुसलाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में बच्चों में यह भावना पैदा हो जाए कि अपने माता पिता के लिए वह ही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है। उनके अंदर एक खास किस्म की अहम की भावना पनपने लगती है। आगे चल कर यही भावना उनके अच्छे नागरिक बनने के मार्ग में बाधा बनती है।

बच्चें के व्यवहार पर काम कर रहे अनेक विशेषज्ञों के अनुसार, हमें बच्चों के व्यवहार पर ध्यान रखने की ज़रूरत तभी से होती है जब वे बहुत छोटे होते हैं क्योंकि घर बच्चों की पहली पाठशाला है और माता पिता उसके पहले शिक्षक। कुछ अन्य विशेषज्ञों का ख्य़ाल है कि इसके लिए उन्हें कुछ नियम बनाने चाहिए जैसे कि बच्चों के साथ मिल बैठकर नियमित समय पर टेलिविज़न देखना। उसका समय तय करें और उस समय उनके साथ ही बैठें।

आपके स्कूल में एक भाषण प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। प्रतियोगिता का विषय है कि क्या सचमुच बच्चों में अनुशासनहीनता बढ़ रही है? ये शैतान बच्चे नामक लेख में से नीचे दिए गए प्रत्येक शीर्षक के अंतर्गत नोट लिखें जिसपर आपका भाषण आधारित होगा।

Question number: 128 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

Essay Question▾

Describe in Detail

माता पिता का क्या न करना बच्चों में विशेष अहम की भावना पैदा करता हैं?

Explanation

कभी- कभी माता पिता अपने बच्चों को पर्याप्त समय देने के बजाय उन्हें तरह-तरह की चीजों से फुसलाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में बच्चों को यह लगता है कि माता पिता के लिए बच्चों से अधिक महत्वपूर्ण ओर कुछ भी नहीं। इसलिए ऐसा करने से बच्चों में विशेष अहम की भावना पैदा हो जाती हैं।

Question number: 129 (2 of 3 Based on Passage) Show Passage

Essay Question▾

Describe in Detail

कौन सी आदतें परिवारों में निरंतर तनाव पैदा करती हैं? कोई तीन आदतें बताइए।

Explanation

1. विपरीत परिस्थितियां बच्चों को गुस्सैल और अनुशासनहीन बनाती हैं।

2. बच्चों के स्वाभाव में आपस में लड़ाई झगड़ा करना और किसी की न सुनना उनकी आदत बन जाती है।

3. माता पिता से यही अपेक्षा करना कि वे उनकी हर जायज़ और नाजायज़ ज़रूरतों को पूरा करेंगे। यही आदतें उन्हें स्वार्थी बनाती हैं। इन्हीं आदतो के कारण परिवार में निरंतर तनाव बना रहता है।

Question number: 130 (3 of 3 Based on Passage) Show Passage

Essay Question▾

Describe in Detail

बच्चों के व्यवहार को सही दिशा देने के बारे में विशेषज्ञों की क्या राय हैं?

Explanation

हमें बच्चों के व्यवहार पर ध्यान रखने की ज़रूरत तभी से होती है जब वे बहुत छोटे होते हैं क्योंकि घर बच्चों की पहली पाठशाला हैं। फिर उनके माता पिता उसके पहले शिक्षक। कुछ अन्य विशेषज्ञों का ख्य़ाल है कि इसके लिए उन्हें कुछ नियम बनाने चाहिए जैसे कि बच्चों के साथ मिल बैठकर नियमित समय पर टेलिविज़न देखना। उसका समय तय करें और उस समय उनके साथ ही बैठें।

Share