CIE Hindi Paper-1: Specimen Questions 119 - 125 of 143

Passage

राजस्थान के झरोखे से झलकता झालावाड़

झालावाड़ मालवा के पठार के छोर पर बसा एक जनपद है, जिसके अंदर झालावाड़ और झालरापाटन नामक जुड़वाँ शहर अपने आप में एक आदर्श पर्यटक स्थल हैं। दोनों शहरों की स्थापना 18वीं शताब्दी के अंत में झाला राजपूतों

दव्ारा की गई थी। दोनों शहरों के मध्य कारीब 7 कि. मी. की दुरी हैं, पर आजादी से पूर्व दोनों शहर झाला वंश के राजाओं की एक समृदव् रियासत का हिस्सा थे।

झालावाड़ शहर के पर्यअन आर्कषणों में से एक है गढ़ महल जो झाला राजाओं का भव्य महल था। शहर के मध्य स्थित इस महल के तीन कलात्मक दव्ार हैं। महल का अग्रभाग चार मंजिला है, जिसमें मेहराबों, झरोखों तथा गुम्बदों का अनुपातिक विन्यास देखने योग्य है। परिसर में नक्कारखान के निकट एक पुरात्व संग्रहालय भी देखने योग्य है। महल का निर्माण 1838 में राज राणा मदन सिंह दव्ारा शुरू करवाया था, जिसे पृश्वीसिंह ने पूरा करवाया। 1921 में राजा भवानी सिंह ने महल के पिछले भाग में एक नाट्‌य शाला का निर्माण करवाया। इसके निर्माण में यूरोपियन ओपेरा शैली का विशेष ध्यान रखा गया था।

शहर से करीब 6 कि. मी. दूर कृष्ण सागर नामक विशाल सरोवर है, जो एकांतप्रिय लोगों को बहुत पंसद आता है। यहाँ किनारे पर एक काष्ठ निर्मित इमारत है। इसे रैन बसेरा कहते हैं। यह इमारत महाराज राजेंद्र सिंह ने ग्रीष्मकालीन आवास के लिए बनवाई थी। यहाँ पर स्थित मंदिर भी शहर की पहचान माने जाते हैं। अत: झालारापाटन को घंटियों का शहर भी कहा जाता है। शहर के मध्य स्थित सूर्य मंदिर झालारापाटन का प्रमुख दर्शनीय स्थल है और वास्तुकला की दृष्टि से अहम भी। इसका निर्माण 10वीं शताब्दी में मालवा के परमार वंशी राजाओं ने करवाया था। हालांकि यह सूर्य मंदिर के नाम से प्रसिदव् है। लेकिन मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की प्रतिमा विराजमान है। इसलिए इसे पद्यनाभ मंदिर भी कहा जाता है। सुर्य मंदिर से कुछ दूर ही प्रसिदव् शांतिनाथ मंदिर स्थित है। 11वीं शताब्दी में निर्मित इस जैन मंदिर के गर्भगृह में भगवान शांतिपथ की सौम्य प्रतिमा विराजमान है, जो 11 फुट ऊँची हैं तथा काले पत्थर से निर्मित है।

झालारापाटन में भी एक विस्तृत सरोवर है, जिसे गोमती सागर कहते हैं। इसके तट पर दव्ारीकाधीश मंदिर एक दर्शनीय स्थान है। झाला राजपूतों के कुल देवता श्री दव्ारीकाधीश को समर्पित मंदिर 1796 में झाला जालिम सिंह दव्ारा बनवाया गया था। शहर के एक छोर पर ऊँची पहाड़ी पर नौलखा का किला एक और पर्यटन आकर्षण है। यह एक अर्धनिर्मित किला हैं, जिसका निर्माण राज राणा पृश्वी सिंह दव्ारा 1860 में शुरू करवाया गया था। इतने सारे पर्यटन आयामों को अपने में समेटे झालावाड़ आज पर्यटकों में अपनी अलग पहचान बना चुका हैं।

Question number: 119 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Following Statement is true or false:

गढ़ महल के गुम्बद और महराबों का आनुपातिक विन्यास सुंदर है।

Answer

TRUE

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गढ़ महल के गुम्बद और महराबों का आनुपातिक विन्यास सुंदर है।

Question number: 120 (2 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Following Statement is true or false:

राज भवानी सिंह ने महल के सामने के भाग में एक नाट्‌य शाला का निर्माण करवाया।

Answer

FALSE

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औतित्य-… राजा भवानी सिंह ने महल के पिछले भाग में एक नाट्‌य शाला का निर्माण करवाया।

Question number: 121 (3 of 9 Based on Passage) Show Passage

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किस इमारत का निर्माण पूरा नहीं हुआ?

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नौलखा किला का निर्माण पूरा नहीं हुआ।

Question number: 122 (4 of 9 Based on Passage) Show Passage

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सूर्य मंदिर में किस देवता की प्रतिमा स्थापित है?

Explanation

सूर्य. . मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की प्रतिमा विराजमान है।

Question number: 123 (5 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Following Statement is true or false:

संग्रहालय का निर्माण 1838 में राज राणा मदन सिंह दव्ारा करवाया गया था।

Answer

TRUE

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संग्रहालय का निर्माण 1838 में राज राणा मदन सिंह दव्ारा करवाया गया था।

Question number: 124 (6 of 9 Based on Passage) Show Passage

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क्यों झालारापाटन को घंटियों का शहर कहते हैं?

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यहाँ पर स्थित मंदिर भी शहर की पहचान माने जाते हैं। इसी मंदिरो की वजह से झालारापाटन को घंटियों का शहर भी कहा जाता है।

Question number: 125 (7 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Following Statement is true or false:

रैन बसेरे का निर्माण ग्रीष्मकालीन आवास के लिए करवाया गया।

Answer

TRUE

Explanation

रैन बसेरे का निर्माण ग्रीष्मकालीन आवास के लिए करवाया गया।

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