CIE Hindi Paper-1: Specimen Questions 105 - 110 of 143

Passage

भारतीय त्यौहार तीज पर निम्नलिखित लेख पढ़िए।

अगले पृष्ठ पर दिए गए कार्य को निर्देशानुसार पूरा कीजिए।

झूमने और झूलने की हरियाली तीज

भारतीय त्यौहार धर्म, शांति और जीवन के उल्लास से जुड़े हुए हैं। उन्हीं त्यौहारों में से हरियाली तीज का त्यौहार ख़ासकर महिलाओं के उल्लास व उमंग का त्यौहार है, जो श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को उत्तर भारत में विशेष रूप से मनाया जाता है।

इस दिन महिलाएँ अपनी सहेलियों के साथ गीत, नृत्य एवं झूला झूलकर आनंदोत्सव मनाती हैं। हरियाली तीज का संबंध श्रावण मास में चारों ओर फेली हरियाली और वर्षा होने की वजह से पैदा हुई अच्छी फसल से यानी खुशहाली से भी है। इसी खुशी की वजह से स्त्रियाँ इस दिन हरे रंग के वस्त्र धारण करती हैं और हरे ही रंग की चूड़ियाँ पहनती हैं और साथ ही हाथों पर हरी-हरी मेंहदी लगाती हैं। तीज पर मेंहदी लगाने का भी विशेष महत्व है। महिलाएं हाथों पर विभिन्न प्रकार के डिजाइनों में मेंहदी लगवाती हैं और इसके अलावा पैरों में महावर भी लगाती हैं, जो उनके सुहाग की निशानी मानी जाती है। यहीं नहीं ये इस खुशी को पूरे सावन-भर झूला झूलते हुए गीत-मल्हार गाकर आनंदित होती हैं।

इन दिनों विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों का भी भरपूर मज़ा लिया जाता है। एक ख़ास बात यह भी है कि आज के दिन शादीशुदा बेटियों के यहाँ सिंघाड़े के रूप में पकवान, गुजिया, घेवर, फैणी आदि भेजने का रिवाज होता है।

हमारा देश विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और पंरपराओं को मानने वाला है, पर आश्चर्य है और विशेषता भी है कि हर धर्म समुदाय का त्यौहार सभी धर्मों और समुदायों के लोग हिल-मिलकर मनाते हैं। यह त्यौहार सामाजिक सदभाव के आधार हैं और इसलिए देश की अनेकता में एकता देश कहा जाता है। यही हमारी राष्ट्रीय पहचान है और यही हमारी ताकत।

आपको अपने स्कूल में हरियाली तीज पर एक निबंध लिखना है। निबंध को लिखने से पहले पाठांश के आधार पर नीचे दिए गए पहलूओं से जुड़ी बातों को संक्षेप में लिखिए।

Question number: 105 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

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तीज का महत्व

Explanation

हरियाली तीज का संबंध श्रावण मास में चारों ओर फेली हरियाली और वर्षा होने की वजह से पैदा हुई अच्छी फसल से यानी खुशहाली से भी है।

Question number: 106 (2 of 4 Based on Passage) Show Passage

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सुहाग की निशानी

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महिलाएं. पैरों में महावर लगाती हैं, जो उनके सुहाग की निशानी मानी जाती है।

Question number: 107 (3 of 4 Based on Passage) Show Passage

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रंग और वस्त्र

Explanation

तीज पर महिलाएं. . हरे रंग के वस्त्र, हरे ही रंग की चूड़ियाँ और साथ ही हाथों पर हरी-हरी मेंहदी लगाती हैं।

Question number: 108 (4 of 4 Based on Passage) Show Passage

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खान-पान और गतिविधियाँ

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आज के दिन शादीशुदा बेटियों के यहाँ सिंघाड़े के रूप में पकवान, गुजिया, घेवर, फैणी आदि भेजने का रिवाज होता है।

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टेलीविजन समाचार-सूचना का एक सही माध्यम

समाचार का यह माध्यम अब स्थाई रूप से हमारी ज़िदंगी में आ चुका है। अब इसे अपने जीवन से निकालना और हटाना तो दूर की बात, इसे कुछ घंटों तक बंद रखना भी असंभव होता जा रहा है। टीवी पर चलती-फिरती तस्वीरों का नशा ऐसा चढ़ता है कि इसके बंद होते ही कुछ छूट जाने का खतरा होता है। दुनिया भर की अच्छी-बुरी ख़बरें बस एक बटन दबाते ही हमारी आँखों के सामने नाचने लगती हैं। लेकिन क्या इससे हमारी ज़िंदगी में सुकून आया है? मेरा जवाब होगा-नहीं आया है। टीवी देखते हुए हम जोश और दबाव महसूस करते हैं। इस जोश और दबाव की परोक्ष मानसिक प्रतिक्रया को हम समझ नहीं पाते। धीरे-धीरे हम टीवी से चिपक जाते हैं।

समाचार और ज्ञान देने में टीवी की भूमिका अखबार और पुस्तकों से कम है। यद्यपि पुस्तकों और अखबारों की अपेक्षा टेलीविज़न की तस्वीर से एक भावनात्मक जुड़ाव होता हैं फिर भी यह एक ऐसा माध्यम है, जिसे पलटकर या दोबारा नहीं देखा जा सकता। इसमें आँखों के सामने से जो एक बार निकल गया, वह कुछ बिंबों में थोड़ी देर के लिए दिमाग में टिकता हैं। जैसे ही दूसरे दृश्य आँखों के सामने से गुज़रते हैं, वैसे ही पुराने बिंब धूमिल हो जाते हैं। यही कारण है कि टीवी पर आई बड़ी खबर भी वैसी सूचना नहीं दे पाती, जो अखबारो के जरिए मिलती है। मुझे लगता है कि टीवी पर तात्कालिकता अधिक महत्वपूर्ण होती है। सबसे पहले और तुरंत आने की होड़ में खबरों की सतह पर ही टीवी के कैमरे गुजर पाते हैं और टीवी रिपोर्टर समाचार को सतह पर ही दिखाते और बताते हैं। न तो खबरों की गहराई में वे हमें ले जाते हैं और न उसके आगे-पीछे के कारण और प्रभाव के बारे में बताते हैं। लाइव कार्यक्रम दर्शकों की उत्तेजना बनाए रखते हैं। छोटी ख़बरों तक लाइव या आँखों देखा हाल की सनसनी तो रहती है, पर अगले दिन तक उसका असर गायब हो जाता है। शायद कह सकते हैं कि टीवी ने कोई ऐसी उल्लेखनीय प्रस्तुति नहीं की है, जिससे हमारा सामाजिक या राजनीतिक जीवन प्रभावित हुआ हो।

आपके स्कूल में एक वाद विवाद प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। आप भी इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेना चाहते हैं। दूरदर्शन-सूचना का एक सतही माध्यम नामक लेख में से नीचे दिए गए प्रत्येक शीर्षक के अंतर्गत टिप्पणियां लिखें जिस पर आपका भाषण आधारित हो।

Question number: 109 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

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पुस्तकों, अखबारों की अपेक्षा टेलीविज़न की कमज़ोरियाँ

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टीवी में आँखों के सामने से जो एक बार निकल गया, वह कुछ बिंबों में थोड़ी देर के लिए दिमाग में टिकता हैं। जैसे ही दूसरे दृश्य आँखों के सामने से गुज़रते हैं, वैसे ही पुराने बिंब धूमिल हो जाते हैं। यही कारण है कि टीवी पर आई बड़ी खबर भी वैसी सूचना नहीं दे पाती, जो अखबारो व पुस्तकों के जरिए मिलती है।

Question number: 110 (2 of 3 Based on Passage) Show Passage

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टेलीविज़न से दूर रहना कठिन

Explanation

समाचार का यह माध्यम अब स्थाई रूप से हमारी ज़िदंगी में आ चुका है। दुनिया भर की अच्छी-बुरी ख़बरें बस एक बटन दबाते ही हमारी आँखों के सामने नाचने लगती हैं।. टीवी देखते हुए हम जोश और दबाव महसूस करते हैं। इस जोश और दबाव की परोक्ष मानसिक प्रतिक्रया को हम समझ नहीं पाते। धीरे-धीरे हम टीवी से चिपक जाते हैं।

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