CIE Hindi Paper-1: Specimen Questions 89 - 93 of 143

Passage

सदभाव का उत्सव ’फूल वालों की सैर’

राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सदभाव का उत्सव ’फूल वालों की सैर एक अनूठे मैले के रूप में चर्चित रहा है जिसका आयोजन अंजुमन-सैर-ए-गुल फरोशाँ नामक संस्था सन्‌ 1961 में लगातार करती आ रही है। इस समारोह का आकर्षण हिंदू-मुस्लिम सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक रंग-बिरंगा पंखा है जो हर साल उपराज्यपाल को पेश किया जाता है।

फूलवालों का काफ़िला लाल किले से इत्र और फूलों की सुगंध बिखेरता हुआ 32 किलोमीटर की दूरी तय करके महरौली स्थित कुतुब मीनार के करीब ख्य़ाजा बख्त़ियार काफी की मज़ार पर फूलों की चादर चढ़ाने हर साल आता है। दूसरे दिन परंपरागत ढंग से इसी मज़ार के समीप योगमाया महालक्ष्मी मंदिर में फूलों का छत्र चढ़ाया जाता है। इस मेले का समापन शनिवार को ’जहाज महल’ में एक भव्य समारोह के साथ होता है। इस मौके पर रात भर कव्वाली और नृत्य के बीच जश्न का माहौल रहता है। पुरानी दिल्ली के निवासी मोहम्मद शम्सी कहते हैं कि ”समय के साथ इस मेले की रौनक कम हो गई है। बस रस्म ही रह गई है। मैं यहाँ हर साल आता हूँ पर अब पहले वाला आनंद नहीं मिलता है।”

’फूलवालों की सैर’ की शुरूआत अकबर शाह दव्तीय (1806 - 1837) के शासन काल में हुई। बादशाह अपने छोटे पुत्र मिर्ज़ा जहाँगीर को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहते थे। ब्रिटिश रेजीडेंट सर सीटन ने इस बात को मंजूर नहीं किया। मिर्ज़ा जहाँगीर ने खुले दरबार में उनका अपमान किया। एक दिन जब शाहज़ादा लालकिले में नौबतखाने पर मौज मना रहा था तभी वहाँ से सीटन हाथी पर गुजरा। मिर्ज़ा जहाँगीर ने उस पर गोली चलाई।

रेजीडेंट तो बच गया, लेकिन उसका सेवक मारा गया। इसी आरोप में शाहज़ादे को इलाहाबाद के लिए निर्वासित कर दिया गया। उनकी माँ ने उसी समय अपने बेटे के बरी होने पर ख्य़ाजा बख्तियार काफी के मजार पर फूलों की चादर चढ़ाने की मन्न्त मानी और फिर अपने बेटे की रिहाई पर फूलों की चादर चढ़ा कर अपनी मन्नत पूरी की। दिल्ली के हिंदुओं ने योगमाया मंदिर में भेंट चढ़ाकर अपनी भागीदारी निभाई। यह तीन दिनों का समारोह इतना शानदार रहा कि बादशाह ने इसे हर साल मनाने का ऐलान किया। 1942 में अग्रेंजों ने इसे बंद कर दिया लेकिन 1961 में अंजुमन सैरे-गुलफ़रोशाँ की कोशिश से यह दोबारा शुरू हुआ और तब से आज तक सिलसिला जारी हैं।

Question number: 89 (3 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Write in Short

फूलवालों की सैर किस भावना का प्रतीक है?

Explanation

फूलवालों की सैर राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सदभाव का प्रतीक हैं।

Question number: 90 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Write in Short

’जहाज महल’ का क्या महत्व हैं?

Explanation

क्योंकि इस मैले का समापन जहाज महल में होता हैं।

Question number: 91 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Write in Short

मिर्ज़ा जहाँगीर के बरी होने की मन्नत को कैसे पूरा किया गया?

Explanation

मिर्ज़ा की माँ ने उसी समय अपने बेटे के बरी होने पर ख्य़ाजा बख्तियार काफी के मजार पर फूलों की चादर चढ़ाने की मन्न्त मानी और फिर अपने बेटे की रिहाई पर फूलों की चादर चढ़ा कर अपनी मन्नत पूरी की।

Question number: 92 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Write in Short

फूलवालों का काफ़िला कहां पहुंचता है?

Explanation

फूलवालों का काफ़िला लाल किले में पहुंचता हैं।

Question number: 93

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Describe in Detail

नरेश यादव की उम्र 16 वर्ष है। वह मकान न. 22, सिविल लांइस, इलाहाबाद में रहता है। टेलि. न. 395759 है। उसे पाँचवीं कक्षा से ही चित्रकला के प्रति विशेष रुचि रही हैं। उसने दो वर्ष पहले इलाहाबाद में अपने चित्रों की प्रदर्शनी भी लगाई थी। प्रदर्शनी की सफलता से प्रोत्साहित होकर नरेश चित्रकला को ही अपने रोजगार स्वरूप अपनाना चाहता हैं। उसे प्राकृतिक सुंदरता आंकने में ज्यादा दिलचस्पी हैं। चटकीले रंगों से उसने कई भौगोलिक परिस्थितियाँ को अपने चित्रों में संजोया है।

नरेश यादव ने समाचार पत्र राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय की कार्यशाला का विज्ञापन देखा और इसके लिए अपना आवेदन भेजने का निर्णय किया।

राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय

जयपुर हाऊस, नई

दिल्ली-110003

दूरभाष 23382835, 23384640 (एक्स. नं. 225)

चित्रकला कार्यशाला

राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय जयपुर हाऊस, नई दिल्ली, विभिन्न तीन वर्ग समूहों, प्रत्येक वर्ग में 60 विद्यार्थियों की चित्रकला कार्यशाला का आयोजन कर रहा है

कनिष्ठ समूह 5 - 8 वर्ष

मध्यम समूह 9 - 12 वर्ष

वरिष्ठ समूह 15 - 17 वर्ष

(कुल 180 विद्यार्थी)

इच्छुक विद्यार्थी राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय जयपुर हाऊस, नई दिल्ली में काउन्टर पर अपने आवेदन पत्र समेत 400 रूपए का पंजीकरण शुल्क जमा करा कर अपने नाम का पंजीकरण करा सकते हैं। पंजीकरण दिनांक 12 जुलाई 2008, प्रात: 10.30 बजे से सायं 4.30 बजे तक। प्रत्येक वर्ग में 60 विद्यार्थियों के पूरा होने तक प्रथम आओ प्रथम पाओ के आधार पर किया जाएगा। (सोमवार अवकाश)

10.30 बजे से मध्याह 1.00 बजे तक कार्यशाला होगी।

सभी विद्यार्थियों को ड्राइंग बोर्ड, कागज, रंग, ब्रश व अन्य सामग्री स्वंय लानी होगी।

अभिभावक और इच्छुक विद्यार्थियो को कार्यशाला संबंधी राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय के नियमों का पालन करना होगा।

आप अपने को नरेश यादव मानकर नीचे दिए गए आवेदन पत्र को भरिए।

Explanation

आवेदन पत्र

राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय

जयपुर हाऊस, नई दिल्ली-110003

दूरभाष 23382835, 23384640 (एक्स. नं. 225)

नाम………. . नरेश यादव……………………………………. .

आयु………16 वर्ष………………………….

स्थायी पता……………. मकान न. 22, सिविल लांइस, इलाहाबाद …………

……………………………………………………………. .

दूरभाष…………. . 395759………………………….

पिछले कितने वर्षों से चित्रकला में रुचि है…………. दो वर्ष ……………………….

चित्रकला के किसी ख़ास रूप में रुचि है,

बताइए…………………… उसे प्राकृतिक सुंदरता आंकने में ज्यादा दिलचस्पी हैं। …………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………. .

(अंक 7)

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