CIE Hindi Paper-1: Specimen Questions 82 - 82 of 143

Passage

प्रसिद्ध सितार वादक अनुष्का शंकर से पत्रकार विभा की बातचीत के कुछ अंश

विभा- अपने बचपन के बारे में कुछ बताइए?

अनुष्का-मेरा जन्म लंदन में हुआ। अपने बचपन के पहले दस साल मैंने लंदन में बिताए। मुझे नौ साल की उम्र से सितार बजाने की शिक्षा मिली। आप जानती हैं कि यह शिक्षा मुझे अपने पिता और सितार के जाने माने कलाकार पंडित रवि शंकर से मिली। अपने बचपन के दस साल लंदन में बिताने के बाद मैं 11 साल की उम्र में केलिफोर्निया चली गई। और मैंने संगीत की पहली प्रस्तुति 13 साल की उम्र में की।

विभा- इतनी कम उम्र से सितार बजाना आपने शुरू किया तो क्या आपने शुरू से ही पेशेयर सितार वादक बनना चाहती थीं?

अनुष्का- मेरे मन में पेशेयर सितार वादक बनने की इच्छा तेज तब हुई जब मैं लगातार सितार बजाती रही। शुरू में तो सिर्फ जानने की कोशिश ही करती रही। सितार के प्रति लगाव पैदा करने में मुझे कुछ साल तो लगे। हालांकि मैं हमेशा सितार सुनती रहती थी लेकिन मैं इसे अपने जीवन में अपनाऊँ या नहीं इसके बारे में मैं पूरी तरह से सोच नहीं पाई थी।

विभा- इस कला को सीखने में मेहनत और साधना के अलावा आपके परिवार की क्या भूमिका रही?

अनुष्का- जो मैंने सीखा उसमें परिवार की परंपरा, सम्मान इस कदर शामिल था कि मैंने बचपन से किसी बात के लिए पिता को न करना या मना करना नहीं सीखा। यद्यपि यह सही है कि मेरे माता पिता ने हमेशा वह सबकुछ करने दिया जो मैं करना चाहती थी। छुट्‌िटयां में अपने दोस्तों के साथ मैं जहां भी जाना चाहती थीं, मेरे माता पिता जाने देते थे।

विभा-यह बताइए कि अब तक आपके कितने एलबम आ चुके हैं?

अनुष्का-अब तक मेरे तीन एलबम आ चुके हैं। पहला एलबम मेरे अपने नाम से ही आया था यानी ’अनुष्का’। उसके बाद सन्‌ 2000 में ’अनुराग’ नामक एलबम आया। तीसरा एलबम ’लाईव करनेगी हॉल’ नाम से जारी किया गया है।

विभा-क्या आपको अपनी बहन नोरा जोन्स की सफलता से किसी किसम की जलन होती है? वह भी पूरी दुनिया में काफी मशहूर गायिका रहीं हैं।

अनुष्का- मुझे लगता है कि मेरा जलना कुछ ऐसा ही होगा जैसे कि मैं ब्रिटनी रिपयर्स से जलूं। हम दोनों दो अलग किस्म का संगीत बजाते हैं और इसके बीच में किसी तरह की तुलना करना ठीक नहीं है। इसलिए अगर मैं अपनी बहन से जलूं तो यह बिल्कुल ठीक नहीं लगता।

आप अनुष्का शंकर के बारे में एक लेख लिखना चाहते हैं। नीचे लिखे शीर्षक या पहलूओं से जुड़ी बातों को संक्षेप में लिखिए।

Question number: 82 (1 of 5 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

निम्नलिखित लेख जो दांतो की समस्या पर केन्द्रित है उसे पढ़ने के बाद संक्षेप में लेख के मुख्य पहलुओं को अपने शब्दों में लिखिए।

आपका लेख संक्षिप्त और 100 शब्दों से ज्य़ादा का नहीं होना चाहिए। संगत बिन्दुओं के समावेश पर 6 अंक तथा इनकी भाषिक अभिव्यक्ति के लिए 4 अंक निर्धारित हैं। पाठांश से वाक्य उतारना उचित नहीं है।

दांतो के रोगों से बचाव

अमरीकी मेडिकल जर्नल में मशहूर दंत रोग विशेषज्ञ डा. जे. ऐ. सिंक्लेयर ने एक लेख में बढ़ते दंत रोगों का मूल कारण हमारे भोजन में विटामिन ए तथा सी की कमी का होना तथा अधिक गर्म और अधिक ठंडे पदार्थों का सेवन करना बताया है। भारत में दंत रोगों से पीड़ित लोगों का आंकड़ा 20 करोड़ से ज्यादा है।

दंत रोगो में सबसे ज्. यादा पायरिया का प्रकोप है। पायरिया से बचाव के लिए मुँह और दांतो की समुचित सफाई बेहद ज़रूरी है। दांतो को साफ़ करने के लिए इस्तेमाल हाने वाला ब्रश की सफाई पर बहुत ही कम ध्यान दिया जाता है जबकि इसे भी गर्म पानी से नियमित रूप से साफ करना ज़रूरी है।

पान, तंबाकू, सिगरेट-जैसी निरर्थक वस्तुओं के सेवन से मुंह की ग्रथियों में विकृति आ जाती है और दांत कमजोर पड़ जाते हैं तथा रोगग्रस्त हो जाते हैं। भोजन के बाद यदि ठीक से मुंह साफ न किया जाए तो खाद्य प्रदार्थों के छोटे कण दांतो की झिरीं या जड़ों में अटक कर सड़न पैदा करते हैं और लैक्टिक एसिड बनाते हैं। इससे दांत गलने लगते हैं। ज्यादा गर्म या जयादा ठंडा भोजन भी दांतो के लिए हारिकारक है। अत: सामान्य तापक्रम के भोजन ही लेने चाहिए। दांतो की सुबह-शाम नियमित सफाई जरूरी है। बच्चों को चोकलेट, फास्ट फूड, शीतल पेय आदि से बचाना चाहिए। दांतो की रक्षा के लिए व्यक्ति को नियमित रूप से नीबूं, संतरा, मौसमी, आंवला, टमाटर-जैसे खट्‌टे फल तथा गाजर, मूली चुकंदर, पत्तेवाली सब्जियां गन्ना, मक्का आदि फल- सब्जियों का सेवन करना चाहिए।

Explanation

लेख -

वैसे तो हम अपने शरीर का ध्यान नहीं रखेगें तो उसमें कई प्रकार के रोग उत्पन्न हो जाएंगे। उन्हीं में से एक है दांत। इसमें पायरिया रोग अधिक होता हैं। इसलिए दांतों की देखभाल बचपन से ही बहुत जरूरी है ताकि हमारे दांत मजबुत बने रहें। इसके लिए बड़ो को सबसे पहले कोई भी धूम्रपान नहीं करना चाहिए। बच्चों में सुबह व रात को खाना खाने के बाद ब्रश करने की आदत डालनी चाहिए ताकि खाने का कोई भी कण दांतों में न रहे। अगर कोई भी मीठे चीजें खाये तो उसके बाद अच्छी तरह दांत साफ करे लें। भोजन में हमेशा विटामिन ए व सी होना चाहिए। दांतो व ब्रश की नियमित सफाई रखे और अपने दांतो को रोगो से मुक्त रखें।

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