CIE Hindi Paper-1: Specimen Questions 57 - 58 of 143

Question number: 57

Essay Question▾

Describe in Detail

क्या सचमुच वीडियों खेलों और टेलीविज़न ने पढ़ने की संस्कृति को प्रभावित किया हैं?

ऊपर लिखे शीर्षक पर आपके स्कूल में एक भाषण प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। आप इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेना चाहते हैं। अपने विचारों को प्रस्तुत करने के उद्देश्य से अपना भाषण नीचे दिए स्थान पर लिखिए।

आपका भाषण 150 से 200 शब्दों से अधिक नहीं होना चाहिए।

लिखित भाषण पर अंक विषय संबंधी अंर्तवस्तु, शैली और सही भाषा लिखने पर दिए जाएंगे।

Explanation

विडियों खेलों और टेलीविजन ये दोनों केवल मनोरंजन का साधन ही नहीं बल्कि अनेक ज्ञानवर्द्धक व शिक्षाप्रद कार्यक्रमों का भी प्रसारण किया जाता हैं। वीडियों गेम के ज़रिए हम अपनी दिमागी कसरत करते हैं स्कोर बनाते है नये नये खेल उसमें सिखते हैं। टी. वी में सुबह व दोपहर में उच्च शिक्षा के कार्यक्रम आने से बच्चों की पढ़ाई में बहुत लाभ होता हैं। इसके अलावा आज ऐसे कितने ही शिक्षाप्रद कार्यक्रम टीवी में दिखाएं जाते है जिससे बच्चों से बड़ों तक का मनोरंजन के साथ साथ पढ़ाई भी हो जाती हैं। आज टीवी व वीडियों गेम के माध्यम से लोगों के मानसिक रूप का विकास बढ़ रहा हैं। लोगों में संस्कृति, कला, तथा मानवता के प्रति रूचि जाग्रत करानें में टीवी की महत्वपूर्ण भूमिका रही हैं।. देखा जाए तो आज हम इन चीजों पर अपने ज्ञान को बढ़ाने के लिए पूर्णतय निर्भर हो गए।. यह सब कुछ विज्ञान की देन हैं जिससे पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा मिला हैं।………

Passage

भूमंडलीकरण के दौर में खेलों के व्यवसायीकरण

व्यवसायीकरण की आंधी से खेलों की दुनिया भी नहीं बची रह सकी। आज खेलों का अपना एक अलग अर्थशास्त्र है। पिछले दिनों भारत में आयोजित इंडियन प्रीमयर लीग यानी आईपीएल ने यह साबित कर दिया कि खेलों का बाजारीकरण किस हद तक किया जा सकता है और यह कितने भारी लाभ का सौदा है। हालांकि, पहले से ही क्रिकेट में पैसों की भरमार रही है लेकिन आईपीएल ने इस खेल की अर्थव्यवस्था को ऐसा विस्तार दिया है कि इसका असर लंबे समय तक बना रहेगा।

एक अनुमान के मुताबिक भारत में खेल उद्योग का आकार दस हजार करोड़ रूपए सालाना तक पहुंच गया है। खेलों ने उत्सव का रूप धारण कर लिया है। यह हमारे दिन-प्रतिदिन के जीवन को प्रभावित करते हैं। बाजार ने खेलों को एक ऐसे उद्योग में तब्दील कर दिया है कि इससे सामान्य जनजीवन पर असर पड़ने लगा है। मैच के हिसाब से लोग अपनी दिनचर्या तय करने लगे हैं। क्रिकेट के अलावा अगर देखें तो भारत में भी अब अन्य खेलों में पैसों का दखल बढ़ा है।

2008 बीजिंग में सम्पन्न ओलंपिक ने भी यह साबित कर दिया कि खेलों की अपनी एक अलग अर्थव्यवस्था है और भूमंडलीकरण के इस दौर में इसकी उपेक्षा नहीं की जा सकती है। बहरहाल, अब हालत ऐसे हो गए है कि खेल प्रतिस्पर्धाएं कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बजट पर असर डालने लगी हैं। इस बात में किसी को भी संदेह नहीं होना चाहिए कि खेलों ने एक उद्योग का स्वरूप ले लिया है।

बहरहाल, इस बार के बीजिंग ओलपिंक के बारह मुख्य प्रायोजक थे। इसमें कोडक जैसी कंपनी भी शामिल रही, जिसने आधुनिक खेलों का साथ 1896 से ही दिया है। इसके अलावा ओलंपिक के बड़े प्रायोजकों में कोका कोला भी थी, जो 1928 से ओलंपिक के साथ जुड़ी हुई हैै। इन बारह मुख्य प्रायोजकों से आयोजकों की संयूक्त आमदनी 866 मिलियन डोलर तक पहुंच गई है। इसके अलावा कई छोटे प्रायोजक भी ओलंपिक में शामिल थे।

वैसे तो ओलंपिक में पदक जीतने वालों को कोई ईनामी राशि नहीं मिलती है। पर जैसे ही कोई खिलाड़ी पदक जीतता है वैसे ही उस पर धन की बरसात होने लगती है। प्रायोजक ऐसे खिलाड़ियों के ज़रिए अपने उद्योग को लोकप्रिय बनाने का मौका नहीं गंवाते हैं। इस भारी लाभ का एक अन्य असर है जिसके अंर्तगत कई सुधार कार्यों के लिए प्रायोजक कंपनियां आगे आई हैं। कंपनियों दव्ारा लाभ का एक अंश उन संस्थाओं को दिया जा रहा है जो स्वास्थ्य, शिशु कल्याण या जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में कार्यरत हैं।

आपके स्कूल में एक निबंध प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। निबंध का विषय है, क्या वास्तव में ’खेलों ने उद्योग का रूप ले लिया है? ’ भूमंडलीकरण के दौर में खेलों का व्यवसायीकरण नामक लेख में से नीचे दिए गए प्रत्येक शीर्षक के अंतर्गत नोट लिखें जिस पर आपका निबंध आधारित होगा।

Question number: 58 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

Short Answer Question▾

Write in Short

भारत में रोज़मर्रा के जनजीवन पर खेलों प्रभाव

Explanation

यह हमारे दिन-प्रतिदिन के जीवन को प्रभावित करते हैं। बाजार ने खेलों को एक ऐसे उद्योग में तब्दील कर दिया है…

इससे सामान्य जनजीवन पर असर पड़ने लगा है। मैच के हिसाब से लोग अपनी दिनचर्या तय करने लगे हैं। क्रिकेट के अलावा अगर देखें तो भारत में भी अब अन्य खेलों में पैसों का दखल बढ़ा है।

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