CIE Hindi Paper-1: Specimen Questions 50 - 55 of 143

Passage

भारतीय मसालों पर लिखे इस आलेख को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

एक लोककथा है कि एक वैद्यजी थे। उनके बगल के घर में नगर श्रेष्ठि विराजते थे। दोनों घरों के बीच साझा दीवार होने से उधर की बातें इधर और इधर की बाते उधर कानों में पड़ना स्वाभाविक था। जाड़ें दिन थे। शाम का खाना जीमने बैठे नगरश्रेष्ठि को वैद्यजी ने कहते सुना कि उन्हें एक कटोरा भर दही भी दिया जाए। वैद्यजी ने बहू से कहा, जाड़े की शाम को एक कटोरा भर दही दिया जाए। इतना सुनकर वैद्यजी ने अपनी बहू से कहा ”जाड़े की शाम को एक कटोरा भर दही खाकर नगरश्रेष्ठि सर्दी और खांसी को निमंत्रण दे रहे हैं। देखना कल ही मुझे उनके इलाज से इतने पैसे मिलेंगे कि तेरे कंगन की जोड़ी पक्की”।

बहू उमंग से उछलती भीतर चली गई। तभी सेठानी की आवाज आई। परसने वाली से उन्होंने कहा कि सेठजी के दही में वह अच्छी चुटकी काली मिर्च, भुने जीरे और काले नमक की बुकनी डालना न भूले हाँ…. । इतना सुनकर वैद्यजी का चेहरा उतर गया और ये बहू से बाले”अब तो सालभर तक तेरे कंगन बनने से रह”।

इसी प्रकार हमारे यहाँ घर-घर में रसोई को रससिद्ध बनाने वाले मिर्च- मसालों से जुड़ी मनोरंजक गाथाएं हमारी लोककथाओं, पुराणों और इतिहास में यहाँ से वहाँ तक विराजमान हैं। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक फेले विशाल देश में खान पान में जो विविधता है यही विविधता मसालों के प्रयोग में भी है। हमारी भाषा और साहित्य की ही तरह हमारे मसाले भी भारतीय और गैर भारतीय तत्वों का एक मिला-जुला बजाना है। उदाहरण के लिए ईसा की पहली सदी तक दक्षिण भारत में चीन से चीनी आती थी। शेष भारत शहद और गुड़ से काम चलाता र्था फिर धीरे-धीरे चीनी का ऐसा चस्का उतर को भी लग गया, कि वहाँ चीनी के स्वरूप में सुधार भी होने लगे। चाय की ही तरह चीन से दालचीनी आई तो कर्पूर और राई भी आए। दक्षिण भारत में कपूर को आज भी ’चीन कर्पूर ’कहते हैं।

मेथी दाना आयुर्वेद की राय में मधुमेह रोगियों के लिए उत्तम दवा है। जिसका प्रयोग जेवनारों में दिव्य सब्जियां या जाड़ों के मेथीपाक जैसे व्यंजन बनाने में सहायक होता है। मेथी भी सदियों पूर्व भारत में यूनान के व्यापारियों के साथ भारत आया। बंगाली खाने की जान पंचफोड़न (यानी मेथी, सॉफ, जीरा, पीली सरसो और कालौंजी इन पांच मसालों के मिश्रण) में भी मेथी विराजमान है। पंचफोड़न के दो अन्य मसाले सॉफ और जींरा भी भूमध्यसागरीय क्षेत से ही भारत आए। अचार, चटनी, मुरब्बे के अलावा उदर रोगों के लिए भी सौंफ का एक शीतलता देने वाले मसाले के रूप में प्रयोग होता हैं। इसी प्रकार जीरे का प्रयोग भारत के सभी प्रांतों में बहुलता से होता है। इसको पाचन क्रिया में मददगार और फ़ितरत (स्वभाव) से गर्म बताया गया है। औषधि के रूप में इसके प्रयोग का वर्णन आयुर्वेदज्ञ चरक ने अपनी पुस्तक ’चरक संहिता’ में किया है। शल्य चिकित्सक सुश्रुत ने भी दवा के रूप् में इसे उपयोगी बताया है।

Question number: 50 (8 of 8 Based on Passage) Show Passage

True-False▾

Following Statement is true or false:

वैद्यजी का घर नगरश्रेष्ठि के घर के सामने था।

Answer

FALSE

Explanation

औचित्य- वैद्यजी के बगल के घर में नगरश्रेष्ठि रहते थे।

Passage

दुकान क्या है, एक झोली में समा जाए बस इतने ही खिलौने हैं उनके पास, लेकिन इनकी विशेषता है कि ये एल्युमिनियम के तारों से बनाए जाते हैं। गुजरात के कच्छ इलाके से आए राजू अपना असली नाम नहीं बताते और कहते हैं कि उन्हें लोग महागुरू राजू के नाम से जानते हैं। वह कहते हैं, ”आप बोलिए जो बनावट या रूप बनाना हैं आपके सामने बना दूंगा। एक तार को मोड़ मोड़ का आपका चेहरा बना दूंगा। यही मेरी कला है।” अल्युमिनियम के एक ही तार को मोड़ कर राजू, साइकिल, रिक्शा, बुद्ध की मूर्ति और न जाने क्या क्या बना लेते हैं।

राजू 35 वर्ष पहले लखनऊ आए और फुटपाथ पर ही घूमते फिरते एल्युमिनियम का काम सीखा। वह कहते हैं, ”इधर एक फ़ौजी अंकल हुआ करते थे जो तारों का काम करते थे। उन्हें मैंने टीवी पर भी देखा है। मैं उनको चाय देता था और बदले में काम सीखता था। ”लेकिन यही काम क्यों? राजू कहते हैं, ”असल में मुझे फ़िल्म देखने का शौक था और उसके लिए पैसे चाहिए होते थे। फ़ौजी अंकल कुछ पैसे देते थे तो फ़िल्म देखता था।”

राजू सिकंदर आर्ट गैलरी के पास बैठकर खिलौने बेचता है और उनके ग्राहकों में कई विदेशी भी शामिल हैं। वह बताते हैं, ”मुझे सबसे बड़ा आर्डर जर्मनी के एक व्यक्ति ने दिया था एक हज़ार साइकिल बनाने का। उसमें मैंने पैसा बनाया लेकिन मुझे अपने माता पिता को पैसे भेजने होते हैं।”

राजू के डिजाइन कई बड़े कलाकार भी खरीदते हैं। राजू बताते हैं कि उनके पास नामी गिरामी चित्रकार भी आया करते थे। राजू दावा करते हैं कि उन्हाेेंने लखनऊ के बगीचों में और चौराहों पर लगी कई मूर्तियों को भी आकार दिया हैं। लेकिन वह इस बात का बुरा नहीं मानते कि उन्हें इसका कोई श्रेय नहीं मिलता। वह कहते हैं, ”हम तो गरीब आदमी हैं। कला आती है लेकिन हमारे संबंध वैसे नहीं हैं। मुझसे कई कलाकार आकर कृतियां बनवाते हैं और अच्छे पैसे देते हैं। मैं इसमें खुश हूं।” सिकंदर आर्ट गैलरी के पास तारों का यह जादूगर बैठे बैठे कई कलाकृतियों को अंजाम दे देता है। कला उसके लिए मायने रखती है लेकिन मशहूर होना उसकी प्राथमिकता नहीं है। महागुरू राजू की जरूरत रोटी है और वह फुटपाथ पर अपनी कला बेचकर मिलने वाली रोटी से खुश रहते हैं।

Question number: 51 (1 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Write in Short

खिलौने बनाने का काम सीखने के बदले राजू फ़ौजी अंकल को क्या देते थें?

Explanation

राजू उनको चाय देता था और बदले में काम सीखता था।

Question number: 52 (2 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Write in Short

राजू दव्ारा डिजाइन की गई मूर्तियां लखनऊ में कहां-कहां देखी जा सकती हैं?

Explanation

राजू दव्ारा डिजाइन की गई मूर्तियां लखनऊ के बगीचों में और चौराहों पर देखी जा सकती हैं।

Question number: 53 (3 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Write in Short

राजू खिलौने के लिए किस वस्तु का उपयोग करता हैं?

Explanation

राजू खिलौने के लिए. . एल्युमिनियम का उपयोग करता हैं।…. .

Question number: 54 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Write in Short

फ़ौजी अंकल से कमाए पैसों का राजू क्या करते थे?

Explanation

राजू को फ़िल्म देखने का शौक था और उसके लिए पैसे चाहिए होते थे। फ़ौजी अंकल कुछ पैसे देते थे तो फ़िल्म देखता था।

Question number: 55

Essay Question▾

Describe in Detail

क्यों मुझे यह फिल्म विशेष रूप से पसंद आई या पसंद नहीं आई?

पिछले हफ्त़े आपने एक फ़िल्म देखी। आप स्कूल पत्रिका के ज़रिए इस फिल्म की समीक्षा लिखना चाहते हैं। ताकि आप फिल्म के विभिन्न पक्षों से अपने साथियों को परिचित करवाएं और बताएं कि क्यों यह फिल्म देखनी चाहिए या क्यों नहीं देखनी चाहिए।

आपकी सामीक्षा 150 से 200 शब्दों से अधिक नहीं होना चाहिए।

लिखित समीक्षा पर अंर्तवस्तु के लिए 10 अंको तक और सटीक भाषा के लिए भी 10 अंको तक दिए जाएंगे।

Explanation

क्यों मुझे यह फिल्म विशेष रूप से पसंद आई या पसंद नहीं आई?

पिछले हफ्त़े आपने एक फ़िल्म देखी। आप स्कूल पत्रिका के ज़रिए इस फिल्म की समीक्षा लिखना चाहते हैं। ताकि आप फिल्म के विभिन्न पक्षों से अपने साथियों को परिचित करवाएं और बताएं कि क्यों यह फिल्म देखनी चाहिए या क्यों नहीं देखनी चाहिए।

आपकी सामीक्षा 150 से 200 शब्दों से अधिक नहीं होना चाहिए।

लिखित समीक्षा पर अंर्तवस्तु के लिए 10 अंको तक और सटीक भाषा के लिए भी 10 अंको तक दिए जाएंगे।

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