CIE Hindi Paper-1: Specimen Questions 1 - 6 of 143

Passage

बाल मित्र ग्राम एक नूतन अवधारणा

वयस्क और बच्चे मिल कर बांस का एक ध्वज बड़ा करने का प्रयास कर रहे थे। सफेद सूती ध्वज जिस पर बाल मित्र ग्राम अंकित था, उसे फहराते हुए उनके उत्साह और उमंग का ठिकाना नहीं था। यह एक बेहद गर्व भरा पल था विशेषकर रामचन्द्रपुर के ग्रामवासियों के लिए। अवसर था रामचन्द्रपुर को बाल मित्र ग्राम घोषित किए जाने का। बच्चों और बड़ों सभी का उत्साह देखते बनता था। यह चमत्कार उन सामाजिक कार्यकत्ताओं और ग्रामवासियों की वजह से संभव हो पाया जिनका मानना था कि उनके बच्चों को भी किसी अन्य बच्चे के समान बेहतर शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है।

बिहार राज्य की राजधानी पटना से लगभग 50 किलोमीटर दूर बसा रामचन्द्रपुर एक आम गाँव है जिसकी आबादी में मुख्यत पिछड़े वर्ग के लोग और आदिवासी लोग शामिल हैं। यहां सबसे पहले उठाए कदम में सभी बच्चों को काम से हटा कर गाँव के समीप एक स्कूल में भर्ती कर लिया गया। अगला कदम था स्कूल में बाल पंचायत का गठन जिसका उद्देश्य स्कूल के सामने आने वाली कठिनाइयों जैसे पुस्तकों की अनुपलब्धि आदि का समाधान करना था।

इसी प्रकार राजस्थान के पापड़ी गाँव में किए गए प्रयासो के अंर्तगत यह सुनिश्चित करता था कि कोई भी बच्चा काम पर न जाए यह अवधारणा भारत के कई राज्यों जैसे बिहार, राजस्थान, हरियाणा, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में सफलतापूर्वक साकार रूप से ले चुकी है। इन्होंने आदर्श बाल मित्र ग्राम के विकास के लिए चौतरफा युक्ति अपनाई हैं जिसमें गाँव से बाल श्रम का उन्मूलन, सभी बच्चों का स्कूलों में दाखिला, बाल पंचायतों का गठन तथा वयस्कों की पंचायत में बच्चों की बातों और मांगों पर गौर किया जाना शामिल है।

बाल मित्र ग्राम के प्रयास का अनुष्ठान गाँव के बाल वर्ग की सक्रिय भागीदारी दव्ारा अपने लिए पंचायतों, समुदायों, स्कूलों और परिवारों में वैध अधिकार हासिल करना और लोगों के सामर्थ्य, शक्ति व स्थानीय संसाधनों को प्रयोग इसकी सफलता और अविच्छिन्नता का एक महत्वपूर्ण कारण है। बाल मित्र ग्राम लिंग समानता पर भी बल देता है जो वासतव में सराहनीय है। बाल पंचायत में बाल नेताओं के चुनाव में लड़कियों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। यह देखा गया है कि बाल संसद का नेतृत्व अधिकार लड़कियाँ करती हैं। वे ही अपने कल्याण तथा विकास संबंधी मामलों को वयस्कों की पंचायत में उठाती हैं।

Question number: 1 (1 of 5 Based on Passage) Show Passage

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रामचन्दपुर की आबादी में प्रमुख हिस्सा किन लोगों का है?

Explanation

जिसकी आबादी में मुख्यत पिछड़े वर्ग के लोग और आदिवासी लोग शामिल हैं।

Question number: 2 (2 of 5 Based on Passage) Show Passage

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बाल पंचायत को स्थापित करने के पीछे प्रमुख प्रेरणा क्या थी? किसी एक पहलू को लिखिए।

Explanation

यहां सबसे पहले उठाए कदम में सभी बच्चों को काम से हटा कर गाँव के समीप एक स्कूल में भर्ती कर लिया गया।

Question number: 3 (3 of 5 Based on Passage) Show Passage

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किस भावना के फलस्वरूप रामचन्द्रपुर को बाल मित्र ग्राम घोषित किया?

Explanation

उनके बच्चों को भी किसी अन्य बच्चे के समान बेहतर शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है। इस भावना के तहत ही रामचन्द्रपुर को बाल मित्र ग्राम घोषित किया गया।

Question number: 4 (4 of 5 Based on Passage) Show Passage

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बच्चों की पंचायत क्यों बनाई गई?

Explanation

बच्चों की पंचायत इसलिए बनाई क्योंकि स्कूल के सामने आने वाली कठिनाइयों जैसे पुस्तकों की अनुपलब्धि आदि का समाधान करना था।

Question number: 5 (5 of 5 Based on Passage) Show Passage

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बाल मित्र ग्राम की अवधारणा ने लड़कियों की भागीदारी के लिए कौन से नए विकल्प बोले? किन्हीं दो पहलूओं को लिखिए।

Explanation

बाल संसद का नेतृत्व अधिकार लड़कियाँ करती हैं। वे ही अपने कल्याण तथा विकास संबंधी मामलों को वयस्कों की पंचायत में उठाती हैं।

Question number: 6

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Describe in Detail

निम्नलिखित आलेख के आधार पर सारांश लिखिए और बताइए कि क्या सचमुच मशीनें सारी तकलीफें दूर कर सकती हैं? आलेख की मुख्य बातों को अपने शब्दों में लिखिए।

आपका सारांश 100 शब्दों से अधिक नहीं होना चाहिए।

संगत बिन्दुओं के समावेश पर 6 अंक और भाषिक अभिव्यक्ति के लिए 4 अंक निर्धारित हैं। पाठांश से वाक्य उतारना उचित नहीं है।

मशीनें सारी तकलीफें दूर नहीं कर सकती

हमारे अनुभव तथा भावनाएँ मूल रूप से हमारे शरीर तथा मन पर निर्भर होती हैं। रोज़मर्रा की जिंदगी के अनुभव के आधार पर हम यह जानते हैं कि मन की खुशी लाभदायी होती है। उदाहरण के लिए दो अलग-अलग आदमी एक ही तरह के दुख को झेलते हैं, परन्तु उनमें से एक अपने मन की शक्ति की वजह से उस दुख का सामना अधिक आसानी से कर सकता है। मेरे विचार में ऐसा सोचना गलत हैं कि मशीनें आदमी की सभी तकलीफें देर कर सकती हैं। बेशक आरामदायी चीजें बहुत उपयोगी हैं, पर साळ-साथ यह भी स्वाभाविक है कि हमारी सभी समस्याएँ केवल इन भौतिक सुख-सुविधाओं की वस्तुओं से दूर नहीं हो सकती। भौतिक वस्तुओं से भरे समाज मेें अधिक नहीं तो उतनी ही मानसिक अशांति और निराशा है। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि आख़िकार हम मनुष्य हैं। हम मशाीनों से नहीं बने और हमारे शरीर मशीनों से अलग हैं। इसलिए हमें अपनी आंतरिक क्षमताओं और गहरे जीवन-मूल्यों के प्रति गंभीरता से सोचना चाहिए। मेरा यह विश्वास है कि यदि कोई सुखी जीवन चाहता है तो आंतरिक और बाहरी दोनों ही बातों की ओर, दूसरे शब्दों में भौतिक और मानसिक विकास की ओर ध्यान देना आवश्यक है। हम आध्यात्मिक विकास की भी बात कर सकते हैं, परंतु जब मैं आध्यात्मिक कहता हूँ तो मेरा मतलब किसी खास धर्म से नहीं है। जब मैं आध्यात्मिक बल की बात करता हूँ तो मेरा मतलब मनुष्य के अच्छे गुणों से है। से गुण जन्म से मिले हुए हैं। ये सब हमारे जीवन में बाद में नहीं आते। धर्म के प्रति विश्वास बाद में आता हैं। सभी धार्मिक उपदेश हमें एक अच्छा आदमी बनने की सलाह देते हैं। से उपदेश हमारे जन्मजात अच्छे गुणों को और शक्तिशाली बनाते हैं। हम सभी के अंदर सृजन करने का एक बहुत ही सहज गुण होता हैं, जिसकी पहचान बहुत ही जरूरी है।

Explanation

लेख

मशीने सारी तकलीफे दूर कर दें यह सही नहीं है क्योंकि ये मशीनें को व्यक्ति अपने सुख के लिए स्वंय बनाया है ताकि वह इसका उपयोग कर सके। हमें तो भगवान ने बनाया हैं। लेकिन इसान की जो भावनाएं होती हैं होती है वे सही रूप से व्यक्ति के शरीर व मन में होती है। यह कितनी होती है यह व्यक्ति के ऊपर निर्भर करती है। क्योंकि व्यक्ति का शरीर इन मशीनों से अलग हैं। मशीनें हमें सब सुविधाएं दे सकती हैं लेकिन जो व्यक्ति के अंदर जो अनेक भावनाएं है वे नहीं दे सकती हैं। इंसान काम आसान जरूर कर सकती है। पर उनके सुख व दुख को केवल एक व्यक्ति ही बांट सकता हैं। इसलिए मशीनें केवल भौतिक सुख-सुविधाओं की वस्तु न की वे व्यक्ति के सारी दुखों का अंत करती हैं इसलिए मशीन व व्यक्ति दोनों अलग हैं।

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